महाराष्ट्र निकाय चुनाव में एक परिवार की अनोखी जीत, 3 अलग-अलग पार्टियों से एक ही घर के लोगों ने जीता चुनाव

महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनावों के नतीजे सामने आने लगे हैं. ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में म्हात्रे परिवार ने कमाल कर दिखाया. परिवार के तीन सदस्यों ने चुनाव लड़ जीत हासिल की है.

Sonee Srivastav

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनावों में कई रोचक नतीजे आए हैं, लेकिन कुछ परिवारों ने अपनी अनोखी सफलता से सबका ध्यान खींचा है. ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में म्हात्रे परिवार ने कमाल कर दिखाया.

परिवार के तीन सदस्यों ने अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर चुनाव लड़ा और तीनों ने जीत हासिल की. यह घटना वंशवादी राजनीति और परिवार की एकजुटता का शानदार उदाहरण बनी है.

म्हात्रे परिवार की तिहरी जीत

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के वार्ड 21 (पैनल 21) में म्हात्रे परिवार ने इतिहास रच दिया. प्रहलाद परशुराम म्हात्रे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के टिकट पर जीत दर्ज की. वहीं, रवीना म्हात्रे ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से और रेखा म्हात्रे ने शिवसेना (शिंदे गुट) से चुनाव जीता. 

तीन अलग-अलग पार्टियों से एक ही परिवार के सदस्यों की यह जीत काफी चर्चा में रही. यह दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर परिवार की मजबूत पकड़ कितनी महत्वपूर्ण होती है. हालांकि, पूरे निगम में महायुति गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना) का प्रदर्शन मजबूत रहा. 

जलगांव में कोल्हे परिवार की भावुक जीत

एक और परिवार ने जलगांव नगर निगम चुनाव में तिहरी सफलता हासिल की. कोल्हे परिवार के तीन सदस्य - ललित कोल्हे, सिंधुताई कोल्हे और पीयूष ललित कोल्हे ने जीत दर्ज की. सबसे खास बात यह कि ललित कोल्हे ने जेल से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. वे फर्जी कॉल सेंटर मामले में गिरफ्तार थे. परिवार ने ललित की रिहाई तक चप्पल न पहनने का संकल्प लिया था. जीत के बाद ललित की पत्नी सरिता कोल्हे भावुक हो गईं.

उन्होंने कहा, "मेरा बेटा, पति और सास ने चुनाव जीता है. हमने चप्पल नहीं पहनी क्योंकि ललित जेल में था. जनता ने सब संभव कर दिया." यह जीत परिवार की एकजुटता और जनता के समर्थन की मिसाल है. बता दें, तीनों ने शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

राजनीतिक परिदृश्य में परिवार का दबदबा

महाराष्ट्र में वंशवादी राजनीति गहरी जड़ें जमाए हुए है. ठाणे जैसे क्षेत्रों में ठाकरे परिवार की विरासत लंबे समय से रही है, लेकिन इस बार महायुति गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन किया.

म्हात्रे और कोल्हे जैसे परिवारों की जीत बताती है कि स्थानीय चुनावों में परिवार की छवि और संबंध कितने असरदार होते हैं. ये नतीजे दिखाते हैं कि राजनीति में व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रभाव कितना बड़ा रोल निभाता है.

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