गरीब रिक्शा चालक के खाते में 300 करोड़ कैसे पहुँचे? अहमदाबाद में 550 करोड़ हवाला रैकेट का पर्दाफाश, कटघरे में सिस्टम और बैंक
अहमदाबाद से एक हैरान करने वाली खबर आई है। एक रिक्शा चालक के बैंक खाते से 300 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। जांच में सामने आया कि इसके पीछे बड़ा हवाला नेटवर्क काम कर रहा था।

अहमदाबाद में एक अजीब मामला सामने आया है। एक साधारण रिक्शा चालक अचानक जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया। वजह थी उसका बैंक खाता। जांच में पता चला कि उस खाते से 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ। यह सुनकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। क्योंकि जिस व्यक्ति का खाता था, उसकी कमाई बहुत कम थी। वह हर महीने सिर्फ 10 से 12 हजार रुपये कमाता था। फिर भी उसके खाते में करोड़ों का खेल चल रहा था।
आखिर कौन है दीप ओड?
जिस व्यक्ति का नाम इस मामले में सामने आया है, वह दीप ओड है। दीप अहमदाबाद में रिक्शा चलाकर अपना गुजारा करता है। उसकी जिंदगी बेहद साधारण बताई जाती है। लेकिन जांच में पता चला कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर पैसों के लेनदेन के लिए हो रहा था। दीप ने पूछताछ में बताया कि उसने अपना बैंक खाता किराये पर दे दिया था। इसके बदले उसे कुछ पैसे मिलते थे। यहीं से इस बड़े खेल का सुराग मिला।
बैंक खाता किराये पर क्यों दिया गया?
जांच एजेंसियों के मुताबिक दीप ने बताया कि उसने 25 हजार रुपये लेकर अपना बैंक खाता करण परमार को इस्तेमाल करने दिया था। यह खाता करण परमार नाम के व्यक्ति को दिया गया था। करण को लोग लाला के नाम से भी जानते हैं। हर चेक पर हस्ताक्षर करने के बदले दीप को 400 रुपये मिलते थे। उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल करके “दीप एंटरप्राइजेज” नाम की एक फर्म भी बना दी गई थी। कागजों पर यह एक व्यापारिक कंपनी थी। लेकिन असल में इसका कोई कारोबार नहीं था।
क्या फर्जी कंपनियों का जाल बनाया गया?
जांच में यह भी सामने आया कि सिर्फ एक कंपनी नहीं बनाई गई थी। कमलेश ट्रेडिंग और रोनक ट्रेडर्स नाम की दो और कंपनियां बनाई गई थीं। ये कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं। इनका कोई वास्तविक व्यापार नहीं था। इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोले गए थे। इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये घुमाए जा रहे थे। पूरा नेटवर्क हवाला के जरिए काम कर रहा था।
कैसे चल रहा था सट्टेबाजी का पैसा?
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क का संबंध क्रिकेट सट्टेबाजी से भी है। ऑनलाइन सट्टेबाजी से आने वाला पैसा इन खातों में डाला जाता था। फिर उसे अलग-अलग जगह भेज दिया जाता था। शेयर बाजार में भी इसी पैसे का इस्तेमाल किया जाता था। सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए शेयरों की कीमतें बढ़ाई जाती थीं। इससे कुछ लोगों को भारी फायदा होता था।
क्या शेयर बाजार में भी खेल हुआ?
जांच के दौरान शेयर बाजार से जुड़ी एक और बात सामने आई। बताया गया कि कुछ कंपनियों के शेयरों की कीमत अचानक बहुत तेजी से बढ़ाई गई। एक कंपनी के शेयर की कीमत 12 महीनों में 10 हजार प्रतिशत तक बढ़ गई थी। यह सामान्य बाजार व्यवहार नहीं माना जाता। इसके बाद सेबी ने उस शेयर की ट्रेडिंग पर रोक लगा दी। अब इस पूरे मामले की अलग से जांच भी चल रही है।
जांच एजेंसियों ने क्या कदम उठाए?
इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED कर रहा है। ED ने अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में करण परमार उर्फ लाला समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें महादेव, जुगल, रवि और वरराज भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में लगी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


