मजदूर आंदोलन में बड़ा खुलासा: सिर्फ नोएडा नहीं, 10 राज्यों में हिंसा फैलाने की थी साजिश
मजदूर आंदोलन के दौरान नोएडा में हुई हिंसा की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. सूत्रों का कहना है कि ये घटनाएं सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं थीं, बल्कि देश भर के 10 राज्यों में हिंसक विरोध प्रदर्शन फैलाने के लिए कई संगठनों ने एक सोची-समझी रणनीति बनाई थी.

नई दिल्ली: श्रमिक आंदोलन के दौरान नोएडा में हुई हिंसा की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. सूत्रों के मुताबिक, यह घटनाएं केवल एक शहर तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इसके पीछे कई संगठनों द्वारा देश के 10 राज्यों में हिंसक प्रदर्शन फैलाने की सुनियोजित रणनीति बनाई गई थी.
जांच में सामने आया है कि इस कथित साजिश की शुरुआत हरियाणा और उत्तर प्रदेश से की गई थी, जिसके बाद इसे मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, असम और त्रिपुरा तक विस्तार देने की योजना थी.
नोएडा को बनाया गया रणनीतिक केंद्र
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा में कथित तौर पर प्रयोग सफल होने के बाद आयोजकों ने उत्तर प्रदेश का रुख किया और नोएडा को मुख्य केंद्र चुना. इसका उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित करना और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करना था, जिससे राज्य की छवि पर असर पड़े.
'दुपट्टा प्लान' से CCTV से बचने की कोशिश
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए खास रणनीति अपनाई थी. महिलाओं को इस तरह प्रशिक्षित किया गया था कि वे प्रदर्शन के दौरान CCTV कैमरों को ढक सकें.
कई वीडियो और फुटेज में देखा गया है कि महिलाएं कैमरों के ऊपर दुपट्टा या कपड़ा डाल रही हैं, ताकि उनकी पहचान दर्ज न हो सके.
हिंसा के लिए फंडिंग और निर्देश के संकेत
जांच एजेंसियों को एक ऑडियो और मैसेज भी मिला है, जिसमें कथित तौर पर निर्देश दिए गए हैं- "10 हजार में छह राउंड गोली चलानी है, कहां भेजना है."
यह भी दावा किया जा रहा है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विरोध-प्रदर्शन के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश की छवि खराब करने और निवेश को प्रभावित करने की योजना थी.
SIT गठित, कई टीमें कर रहीं छापेमारी
हिंसा से जुड़े मामलों की जांच के लिए जिला पुलिस ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है. इसमें एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी समेत कई पुलिसकर्मी शामिल हैं.
चिह्नित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए स्वॉट, सीआरटी सहित छह टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.
युवतियों से पूछताछ, कनेक्शन खंगाल रही पुलिस
मुख्य आरोपी रूपेश राय के कोर ग्रुप से जुड़ी मनीषा, आकृति और सृष्टि गुप्ता को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है.
पुलिस प्रदर्शन में उनकी भूमिका और अन्य संपर्कों की जांच कर रही है, साथ ही आदित्य आनंद से उनके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भड़काने के आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि 'मजदूर बिगुल' नामक संगठन अपने ऑनलाइन पोर्टल और वेबसाइट के जरिए श्रमिकों को भड़काने का काम कर रहा था.
आदित्य आनंद की पुलिस कस्टडी रिमांड पर सुनवाई 24 अप्रैल को प्रस्तावित है.
दिल्ली में धरने का ऐलान
इस मामले में हुई कार्रवाई के विरोध में ‘सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस’ (सीटू) ने नाराजगी जताई है. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन में शिकायत करने और 24 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर संयुक्त धरना देने की घोषणा की है.
हल्द्वानी में भी उपद्रव की कोशिश नाकाम
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भी इसी तरह की साजिश का खुलासा हुआ है. एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी के मुताबिक, मोटाहल्दू और लालकुआं क्षेत्र में श्रमिकों की आड़ में बड़े स्तर पर हिंसा भड़काने की योजना थी.
उन्होंने बताया कि इसके तार नोएडा और नेपाल से जुड़े आरोपियों से जुड़े थे, लेकिन पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया.
डिजिटल सबूतों की जांच जारी
पुलिस आरोपियों से बरामद मोबाइल और लैपटॉप की जांच कर रही है. कुछ संवेदनशील डाटा के लिए गूगल से संपर्क किया गया है और जवाब मिलने के बाद जांच में और खुलासे होने की उम्मीद है.
इससे पहले एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने पुष्टि की थी कि जिन दो अकाउंट से अफवाहें फैलाई गईं, उनका संचालन पाकिस्तान से किया जा रहा था.


