ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को लिखा लेटर, कहा- तुरंत रोक दें SIR

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया अनियोजित और जबरन लागू की जा रही है, जिससे न केवल नागरिकों बल्कि अधिकारियों को भी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है.

एसआईआर प्रक्रिया पर ममता बनर्जी की सख्त टिप्पणी

ममता बनर्जी ने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि उन्होंने पहले भी इस प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताओं को उठाया था, लेकिन स्थिति बिगड़ने के कारण उन्हें मजबूर होकर सीईसी को यह पत्र लिखना पड़ा. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के इस पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया बिना किसी ठोस तैयारी और योजना के लोगों पर थोपी जा रही है.

उन्होंने लिखा कि अधिकारियों और नागरिकों पर इस प्रक्रिया का दबाव न केवल अव्यवस्थित और अनियोजित है, बल्कि खतरनाक भी साबित हो रहा है. बुनियादी तैयारी, योजना और स्पष्ट संचार के अभाव ने इस अभियान को शुरू से ही कमजोर बना दिया है. ममता बनर्जी ने प्रशिक्षण में कमी, आवश्यक दस्तावेजों के बारे में अस्पष्ट निर्देश और मतदाताओं के लिए बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) से मिलने की कठिनाइयों का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया संरचनात्मक रूप से दोषपूर्ण हो गई है.

मानवीय कीमत पर जताई चिंता 

मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया की मानवीय कीमत पर भी चिंता जताई. उन्होंने जलपाईगुड़ी में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत का हवाला दिया, जो एसआईआर से जुड़ी अत्यधिक दबावपूर्ण परिस्थितियों के कारण मानसिक रूप से टूट गई थीं. ममता बनर्जी ने कहा कि इसके बाद और भी कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसे हालात में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है.

ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से अपील की है कि एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को जबरदस्ती लागू न किया जाए, अधिकारियों और कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण और समर्थन दिया जाए और समयसीमा और कार्यप्रणाली का पुनर्मूल्यांकन किया जाए.

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