8 बार हुई मोदी-ट्रंप की बातचीत, भारत ने अमेरिका के इस दावे की निकाली हवा

भारत ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के बयान को गलत ठहराया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि व्यापार समझौते में देरी मोदी की व्यक्तिगत बातचीत की वजह से नहीं हुई. 50% टैरिफ, रूस से तेल आयात और वार्ता गतिरोध से आर्थिक दबाव बढ़ा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के उस बयान को गलत बताते हुए खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इसलिए नहीं हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका दोनों पक्षों ने पिछले साल से द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर लगातार बातचीत की है और कई बार समझौते के करीब भी पहुंचे.

रणधीर जायसवाल का बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2025 से व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. दोनों पक्ष संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर पहुंचने के लिए कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. कुछ खबरों में इन वार्ताओं का विवरण सही नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 में आठ बार फोन पर बात की, जिसमें दोनों नेताओं ने अपनी व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की.

टैरिफ और समझौते में गतिरोध

लटनिक ने ऑल-इन पॉडकास्ट में कहा था कि भारत-अमेरिका समझौता इसलिए रुका क्योंकि मोदी ने ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से कॉल नहीं किया. इसके बाद अगस्त में ट्रंप ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाया, जिसमें रूस से तेल की खरीद पर 25% अतिरिक्त शुल्क और 25% पारस्परिक टैरिफ शामिल था. लटनिक ने कहा कि भारत झटके के गलत पक्ष पर आ गया और समय निर्णायक था, जबकि देरी भारत की जटिल राजनीतिक और संसदीय प्रक्रियाओं को दर्शाती है.

व्यापारिक हित और व्यक्तिगत नाराजगी

अमेरिका का यह रुख संकेत देता है कि ट्रंप का कड़ा टैरिफ नीति व्यापारिक मुद्दों से अधिक व्यक्तिगत नाराजगी से प्रेरित था. लटनिक ने यह भी कहा कि भारत पहले जिन शर्तों के तहत समझौते के करीब था, वे अब मान्य नहीं हैं. उन्होंने ब्रिटेन के उदाहरण का हवाला दिया, जहां प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने समय पर ट्रंप से बात करके समझौते को अंतिम रूप दिया.

भारत की प्रतिबद्धता 

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और वार्ता को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए उत्सुक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस गतिरोध का समाधान निकालने में सफल होगा.

अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक प्रभाव

टैरिफ और लंबित वार्ता के कारण निवेशकों में असुरक्षा बढ़ी है और रुपये पर दबाव पड़ा. इसके अलावा, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर भारत रूस से तेल का आयात कम नहीं करता तो टैरिफ में और वृद्धि की जा सकती है. इस बीच व्यापार समझौते का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है.

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