लोकसभा में पीएम मोदी का हल्का तंज बना चर्चा का विषय, अखिलेश को मित्र बताया, महिला आरक्षण बहस के बीच सियासत में नई गर्माहट

महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने अखिलेश यादव को मित्र बताया। सदन में हल्का माहौल बना। लेकिन बयान के पीछे बड़ा सियासी संकेत भी छिपा माना जा रहा है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा चल रही थी। माहौल गंभीर था। इसी दौरान एक हल्का पल सामने आया। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बीच में कुछ कहा। इस पर पीएम मोदी ने जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अखिलेश यादव उनके मित्र हैं। यह सुनकर सदन में हंसी गूंज उठी। माहौल कुछ पल के लिए हल्का हो गया।

पीएम मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश यादव मेरे मित्र हैं। कभी-कभी मेरी मदद कर देते हैं। इस बयान को सुनकर अखिलेश यादव भी मुस्कुरा दिए। उन्होंने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी। यह दृश्य काफी चर्चा में आ गया। राजनीतिक हलकों में इसे अलग-अलग नजर से देखा जा रहा है।

क्या इसके पीछे कोई सियासी संदेश है?

पीएम मोदी का यह बयान सिर्फ मजाक नहीं माना जा रहा। इसे एक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। संसद में ऐसे मौके कम ही आते हैं जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच हल्का संवाद दिखे। यह बयान उसी तरह का था। कुछ लोग इसे सॉफ्ट पॉलिटिक्स बता रहे हैं। कुछ इसे रणनीतिक टिप्पणी मान रहे हैं।

महिला आरक्षण पर क्या बोले पीएम?

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में महिला आरक्षण का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस बिल का समर्थन करें। उन्होंने यह भी कहा कि जो इसका विरोध करेंगे, उन्हें राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। यह बयान काफी सख्त माना जा रहा है।

क्या 30 साल पहले लागू होना चाहिए था?

पीएम मोदी ने कहा कि यह बिल बहुत पहले लागू होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि 25-30 साल पहले जब यह विचार आया था, तब इसे लागू कर देना चाहिए था। उन्होंने इसे ऐतिहासिक मौका बताया। उन्होंने कहा कि यह संसद के इतिहास का अहम पल है। इसे खोना नहीं चाहिए।

क्या महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी?

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की 50 फीसदी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी से देश की दिशा बदलेगी। उन्होंने इसे समय की मांग बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अब देरी नहीं होनी चाहिए। यह कदम देश को नई दिशा देगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने सियासत को और गर्म कर दिया है। एक तरफ हल्का बयान चर्चा में है। दूसरी तरफ महिला आरक्षण पर तीखी बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है। सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।

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