पीएम मोदी ने मेगा समिट में भारत का मानव एआई विजन किया प्रस्तुत, नैतिक उपयोग की वकालत की

भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के “मानव दृष्टिकोण” की रूपरेखा प्रस्तुत की.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत तेजी से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और देश इस क्षेत्र में एक ऐसे मॉडल को बढ़ावा दे रहा है, जो सभी के लिए सुख और सभी के लिए कल्याण के सिद्धांत पर आधारित है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का उद्देश्य केवल तकनीकी प्रगति करना नहीं है, बल्कि एआई को मानव-केंद्रित, सुरक्षित और समावेशी बनाना भी है.

मानव दृष्टिकोण की रूपरेखा 

राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के “मानव दृष्टिकोण” (HUMAN Vision) की रूपरेखा प्रस्तुत की. उन्होंने बताया कि 'मानव' शब्द केवल एक नाम नहीं, बल्कि एआई के विकास के लिए भारत की मूल सोच और सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करता है.

प्रधानमंत्री के अनुसार, 'मानव' में ‘म’ का अर्थ नैतिकता और नीतिगत मूल्यों से है, जो एआई के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करता है. ‘अ’ जवाबदेह शासन और पारदर्शिता का प्रतीक है, जिससे तकनीक का उपयोग जनता के हित में हो. ‘न’ राष्ट्रीय संप्रभुता और डेटा सुरक्षा को दर्शाता है, जिससे देशों की डिजिटल स्वतंत्रता बनी रहे. दूसरा ‘अ’ एआई की पहुंच को आसान और समावेशी बनाने की बात करता है, ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके. वहीं ‘व’ का मतलब वैधता और न्यायसंगत उपयोग से है, जिससे तकनीक का इस्तेमाल निष्पक्ष और संतुलित तरीके से हो.

एआई विकास पर क्या बोले पीएम मोदी? 

उन्होंने कहा कि एआई का विकास केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे मानव मूल्यों और नैतिक दिशानिर्देशों के अनुरूप होना चाहिए. प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत का यह मानव-केंद्रित दृष्टिकोण 21वीं सदी में एआई के वैश्विक विकास को सही दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा.

प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है, जो तकनीकी प्रतिभा का एक विशाल स्रोत प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल नवाचार, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के क्षेत्र में मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है, जो एआई के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है.

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एआई को एक ऐसे साधन के रूप में विकसित करना चाहता है, जो मानवता की सेवा करे, सामाजिक समानता को बढ़ावा दे और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक बने.

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