नेपाल में अहम आम चुनाव: जनरेशन जेड आंदोलन के बाद 275 सीटों पर मतदान आज

जनरेशन जेड के उग्र विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल में आज अहम आम चुनाव हो रहे हैं. 275 सीटों पर मुकाबला पारंपरिक सियासत और नई पीढ़ी की राजनीति के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: नेपाल में गुरुवार को अत्यंत महत्वपूर्ण आम चुनाव शुरू हो गए हैं. ये चुनाव उस व्यापक राजनीतिक उथल-पुथल के कुछ ही महीनों बाद हो रहे हैं, जिसने केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था. इन चुनावों को देश की पारंपरिक राजनीतिक ताकतों और उभरती युवा पीढ़ी के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है.

जनरेशन जेड के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने नेपाल की राजनीति की दिशा बदल दी थी. अब 18.9 मिलियन से अधिक मतदाता 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के गठन के लिए मतदान कर रहे हैं, जिसे स्थापित सियासी दिग्गजों बनाम युवा आंदोलन पर जनमत संग्रह के तौर पर भी देखा जा रहा है.

275 सीटों पर मुकाबला, 65 दल मैदान में

देशभर में सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक चलेगा. 10,967 मतदान केंद्रों और 23,112 केंद्रों पर वोटिंग की व्यवस्था की गई है. मतपेटियां सुरक्षित होते ही मतगणना शुरू कर दी जाएगी और फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत 24 घंटे के भीतर परिणाम घोषित होने की संभावना है.

275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में से 165 सीटें फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली से तय होंगी, जबकि 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के जरिए भरी जाएंगी. 165 प्रत्यक्ष निर्वाचन क्षेत्रों में 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं, वहीं 110 आनुपातिक सीटों के लिए 3,135 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. कुल 65 राजनीतिक दल इस चुनावी मुकाबले में शामिल हैं.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए देशभर में 3 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. दूरदराज के इलाकों में मतपेटियों को हेलीकॉप्टरों के जरिए पहुंचाया जाएगा.

गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल ने मतदाताओं से अपील की कि वे "बिना किसी चिंता के" मतदान करें. उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का आश्वासन दिया. मतदान को सुगम बनाने के लिए सरकार ने तीन दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है.

सड़कों पर उबाल से लेकर संसद भंग होने तक

राजनीतिक संकट की शुरुआत 8 और 9 सितंबर 2025 को दो दिनों तक चले उग्र विरोध प्रदर्शनों से हुई थी. हजारों युवा प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू सहित कई शहरों में रैलियां निकालीं और राजनीतिक व्यवस्था पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पीढ़ीगत बदलाव को रोकने के आरोप लगाए.

हिंसक झड़पों के कारण राजधानी के कुछ हिस्सों में हालात ठप हो गए थे. बढ़ते दबाव के बीच कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और सुशीला कार्की को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जिससे नए चुनावों का रास्ता साफ हुआ.

इन प्रदर्शनों की अगुवाई मुख्य रूप से जनरेशन जेड के मतदाताओं ने की थी, जिनकी मांगों में भ्रष्टाचार विरोधी सुधार, पारदर्शी शासन, आंतरिक पार्टी लोकतंत्र और उम्रदराज नेतृत्व से अलग नई दिशा शामिल थी.

पुरानी बनाम नई राजनीति की जंग

यह चुनाव अब पारंपरिक राजनीतिक दलों और नई उभरती पार्टियों के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा बन चुका है. 75 वर्षीय ओली, सीपीएन-यूएमएल की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं और खुद को स्थिरता के प्रतीक के रूप में पेश कर रहे हैं.

नेपाली कांग्रेस ने 49 वर्षीय गगन थापा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जिसे पार्टी के भीतर पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

वहीं, रबी लामिछाने और काठमांडू के मेयर व पूर्व रैपर बलेंद्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने खुद को जनरेशन जेड की असली आवाज बताने की कोशिश की है. 35 वर्षीय बालेन झापा-5 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और सीधे तौर पर ओली को चुनौती दे रहे हैं. यह वही सीट है, जहां से अनुभवी नेता छह बार जीत दर्ज कर चुके हैं, जिससे यह मुकाबला इस चुनाव का सबसे चर्चित रण बन गया है.

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