मणिपुर से एक साल बाद हटेगा राष्ट्रपति शासन, बीजेपी नेता युमनाम खेमचंद मणिपुर होंगे मणिपुर के नए मुख्यमंत्री
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले ही नई सरकार का गठन होने जा रहा है. बीजेपी नेता युमनाम खेमचंद मणिपुर के नए मुख्यमंत्री बनेंगे.

इंफालः मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले ही नई सरकार का गठन होने जा रहा है. बीजेपी नेता युमनाम खेमचंद मणिपुर के नए मुख्यमंत्री बनेंगे. मणिपुर में अशांति के बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. हालांकि, छह महीने के बाद फिर से राष्ट्रपति शासन बढ़ाया गया था.
आपको बता दें कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का दूसरा कार्यकाल 13 फरवरी 2026 को समाप्त होने वाला है. इसके ठीक पहले सोमवार को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया. इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सत्यब्रत सिंह, पूर्व मंत्री वाई. खेमचंद सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए. पार्टी ने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, ताकि नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो सके.
क्यों लगा राष्ट्रपति शासन?
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच भयंकर जातीय हिंसा जारी है, जिसमें 250 से अधिक लोग मारे गए और 60,000 से ज्यादा विस्थापित हुए. हिंसा के कारण राजनीतिक संकट गहराया, जिसके चलते 9 फरवरी 2025 को बीरेन सिंह सरकार ने इस्तीफा दे दिया. अगले दिन 13 फरवरी 2025 को पहली बार छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगा.
अगस्त 2025 में इसे और छह महीने बढ़ाया गया. अब यह दूसरा कार्यकाल खत्म होने वाला है और केंद्र सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने की कोशिश में जुटी है. यदि समय पर सरकार नहीं बनी तो संसद में संवैधानिक संशोधन या विस्तार की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन भाजपा इसे टालना चाहती है.
भाजपा की मजबूत स्थिति
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है. 2022 के चुनाव में पार्टी ने 32 सीटें जीती थीं, लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) के पांच विधायकों के दलबदल के बाद इसकी संख्या 37 हो गई. इसके अलावा एनपीपी के छह, नागा पीपुल्स फ्रंट के पांच, कांग्रेस के पांच, कुकी पीपुल्स अलायंस के दो, जेडीयू का एक और तीन निर्दलीय विधायक हैं. एक सीट विधायक की मौत से खाली है. भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए मुख्यमंत्री चुनना आसान लगता है. हालांकि, जातीय विभाजन के कारण मैतेई, कुकी और नागा विधायकों को एकजुट करना चुनौतीपूर्ण है.
सामने हैं कई चुनौतियां
जातीय तनाव अभी भी गहरा है. मैतेई और कुकी क्षेत्र अलग-अलग हैं. सामान्य जीवन ठप है. भाजपा का मानना है कि चुनी हुई सरकार ही स्थिति सुधार सकती है. यदि सफल हुई तो यह मणिपुर में एक साल से अधिक के केंद्रीय शासन के बाद बड़ा बदलाव होगा. विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, इसलिए नई सरकार को समय पर चुनाव और विकास कार्यों पर ध्यान देना होगा.


