नांदेड़ साहिब को पवित्र शहर का दर्जा क्यों बना पंजाब सरकार की नई बड़ी सियासी मांग

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान नांदेड़ साहिब पहुंचे। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से पवित्र शहर का दर्जा देने की बात कही। इसके पीछे आस्था, राजनीति और विरासत तीनों जुड़े हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

नांदेड़ साहिब केवल एक तीर्थ नहीं है। यह सिख इतिहास का अहम केंद्र है। यहीं दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने जीवन का अंतिम समय बिताया। यही वजह है कि इसका महत्व पंजाब से भी आगे जाता है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसी भाव को सामने रखा। उन्होंने कहा कि नांदेड़ साहिब पूरी मानवता के लिए पवित्र स्थल है। इसलिए इसे पवित्र शहर का दर्जा मिलना चाहिए। यह मांग भावनात्मक भी है और नीतिगत भी।

पंजाब सरकार ने यह मुद्दा क्यों उठाया?

पंजाब सरकार पहले ही अमृतसर साहिब, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो को पवित्र शहर घोषित कर चुकी है। यह फैसला लंबे समय से लंबित मांग पर लिया गया था। अब उसी कड़ी में नांदेड़ साहिब का नाम जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि गुरु साहिबानों की विरासत को केवल पंजाब तक सीमित नहीं किया जा सकता। जहां गुरु रहे, वहां सम्मान मिलना चाहिए। यही सोच इस मांग के पीछे है।

महाराष्ट्र सरकार से क्या अपेक्षा है?

मुख्यमंत्री मान ने साफ कहा कि उनकी सरकार महाराष्ट्र सरकार के सामने यह मांग मजबूती से रखेगी। उनका तर्क है कि नांदेड़ साहिब को पवित्र शहर घोषित करना किसी एक राज्य का नहीं, पूरे देश का विषय है। यह फैसला सिख समुदाय की भावनाओं से जुड़ा है। साथ ही यह सांस्कृतिक सम्मान का सवाल भी है। अब नजर इस पर है कि महाराष्ट्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

पंजाब भवन का कायाकल्प क्यों अहम है?

नांदेड़ में स्थित पंजाब भवन श्रद्धालुओं के लिए अहम ठिकाना है। मुख्यमंत्री ने इसके पूर्ण कायाकल्प की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। साथ ही वेरका दूध उत्पादों की आपूर्ति भी बेहतर की जाएगी। यह कदम केवल सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान का संकेत माना जा रहा है।

सिख विरासत को लेकर सरकार की सोच क्या है?

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु साहिबानों की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सरकार का कर्तव्य है। गुरु गोबिंद सिंह जी और गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान आज भी समाज को दिशा देते हैं। पंजाब सरकार इसी विरासत को जीवित रखना चाहती है। हाल ही में गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस श्रद्धा से मनाया गया। यह सिर्फ आयोजन नहीं, एक संदेश था।

पंजाबियों की भूमिका का जिक्र क्यों आया?

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पंजाबियों के योगदान की भी बात की। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई हो या देश की सीमाओं की रक्षा, पंजाबियों ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई। आपदा के समय भी वे सबसे पहले मदद को पहुंचते हैं। यह जिक्र केवल गर्व के लिए नहीं था। यह बताने के लिए था कि सेवा और बलिदान सिख परंपरा का हिस्सा है।

इस पूरे संदेश का असली मतलब क्या है?

नांदेड़ साहिब में मुख्यमंत्री की मौजूदगी केवल धार्मिक यात्रा नहीं थी। यह एक सियासी और सांस्कृतिक संदेश भी था। पवित्र शहर की मांग, सुविधाओं की घोषणा और विरासत की बात एक साथ आई। इसका मतलब साफ है। पंजाब सरकार गुरु परंपरा को सम्मान और नीति दोनों स्तर पर आगे बढ़ाना चाहती है। अब देखना है कि इस मांग पर आगे क्या कदम उठते हैं।

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