‘देश को अंधेरे में रखा गया’, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर AAP नेता धालीवाल का हमला
आम आदमी पार्टी पंजाब ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी का आरोप है कि सस्ते और सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय किसानों के लिए गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर सकते हैं.

चंडीगढ़: भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सियासत तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने इस समझौते पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे किसानों के लिए नुकसानदायक बताया है. पार्टी का कहना है कि यदि यह समझौता मौजूदा रूप में लागू हुआ तो देश के छोटे और मध्यम किसानों पर इसका सीधा और बुरा असर पड़ेगा.
आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि के लिए खतरे की घंटी है. उनके अनुसार, इससे अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में बड़ी राहत मिलेगी, जबकि भारत के किसान पहले ही लागत और कम समर्थन मूल्य जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
धालीवाल ने भाजपा नेता सुनील जाखड़ पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन किसानों पर पड़ने वाले प्रभावों को नजरअंदाज कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं है और शुरुआत से ही अपनी आपत्ति दर्ज कराती रही है.
कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका
धालीवाल ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादित लाल ज्वार (रेड सॉर्गम) को भारी सब्सिडी मिलती है. यदि ऐसे उत्पाद भारत में कम कीमत पर आने लगे, तो महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसान, जो बिना पर्याप्त सरकारी सहायता के खेती करते हैं, प्रभावित होंगे.
उन्होंने आशंका जताई कि मक्का, बाजरा, कपास, सेब, बादाम और डेयरी उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भी यही स्थिति बन सकती है. उनका कहना था कि यदि सस्ते अमेरिकी उत्पाद बाजार में भर गए तो पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के किसानों के सामने प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा.
टैरिफ को लेकर सवाल
आप नेता ने टैरिफ दरों में बदलाव को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उनका आरोप था कि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में शुल्क बढ़ा है, जबकि भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क में बड़ी कटौती की है. उन्होंने इसे संतुलित व्यापार के बजाय एकतरफा कदम बताया.
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
धालीवाल ने कहा कि इस समझौते से पहले संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हुई और देश को पूरी जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने भाजपा नेताओं से स्पष्ट जवाब मांगा कि यह समझौता भारतीय किसानों के हित में कैसे है.
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के लिए लाभकारी होना चाहिए, लेकिन यदि इससे देश के किसानों की आजीविका खतरे में पड़ती है तो उस पर गंभीर पुनर्विचार होना चाहिए.
आगे की रणनीति
आम आदमी पार्टी ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर किसानों के बीच जाएगी और केंद्र सरकार से पारदर्शिता की मांग करेगी. पार्टी का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा सर्वोपरि है और किसी भी ऐसी नीति का विरोध किया जाएगा जो कृषि क्षेत्र को कमजोर करे.
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है. आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और चर्चा का विषय बन सकता है, खासकर तब जब कृषि और व्यापार नीति से जुड़े फैसले सीधे लाखों किसानों के जीवन को प्रभावित करते हों.


