पंजाब जलमग्न, हाहाकार मचा… 30 जानें गईं, स्कूल–कॉलेज बंद, बाढ़ ने तबाह कर दिया जनजीवन
पंजाब में बाढ़ ने कहर ढा दिया है। नदियां उफान पर हैं, गांव डूब गए हैं और अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने हालात गंभीर देखते हुए 7 सितंबर तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद करने का ऐलान किया।

पंजाब न्यूज. भारी बारिश और पहाड़ों से छोड़ा गया पानी पंजाब पर आफ़त बनकर टूटा है। सतलुज, ब्यास और रावी जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पानी खेतों और गांवों में घुस चुका है। कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा मंजर उन्होंने दशकों में पहली बार देखा है। बाढ़ के बढ़ते स्तर ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है और राहत दल लगातार जूझ रहे हैं।
स्कूल-कॉलेज बंद, पढ़ाई पर असर
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के आदेश पर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने घोषणा की है कि राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी 7 सितंबर तक बंद रहेंगे। पहले यह छुट्टियां 3 सितंबर तक थीं लेकिन हालात बिगड़ते देख इन्हें आगे बढ़ाया गया। बच्चों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ा है। सरकार ने साफ कहा है कि सबसे पहले बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
मौत और तबाही का आंकड़ा
अब तक इस बाढ़ में 30 लोगों की जान जा चुकी है। कई गांवों से लाशें बरामद हुई हैं। 50 लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। हजारों घर ढह गए और फसलें पानी में डूब गईं। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत की पूरी कमाई बर्बाद हो गई। लोग राहत शिविरों में पनाह ले रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द उनकी मदद करेगी।
फसलें चौपट, किसान मायूस
पंजाब के किसानों पर इस बाढ़ का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। धान की खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। खेत पानी में डूबे पड़े हैं और पशुधन भी बह गया है। किसान अपने नुकसान से टूट चुके हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने जल्द मुआवज़ा और राहत नहीं दी तो उनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
गांवों में हाहाकार, लोग बेघर
हजारों गांवों में पानी घुस गया है। घरों की दीवारें गिर गईं, सड़कें टूट गईं और पुल बह गए। लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। बच्चे, बूढ़े और औरतें सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। राहत शिविरों में भीड़ बढ़ती जा रही है। जिनके पास कोई आसरा नहीं है, वे खुले आसमान के नीचे रातें काट रहे हैं।
पंजाब सरकार और राहत दल सक्रिय
सरकार ने सभी जिलों में अलर्ट जारी किया है। एनडीआरएफ और सेना के जवान बचाव कार्य में जुटे हैं। नावों से लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। मुख्यमंत्री मान खुद हालात का जायज़ा ले रहे हैं और प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। हालांकि लगातार बढ़ते पानी ने बचाव दलों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई जगह तक पहुँचना भी नामुमकिन हो रहा है।
इंसानियत के मददगार हाथ
इस तबाही के बीच इंसानियत भी चमक रही है। गुरुद्वारे, मस्जिदें और मंदिर लंगर और राहत सामग्री बांट रहे हैं। सामाजिक संगठन मदद के लिए आगे आए हैं। लोग एक-दूसरे को सहारा दे रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं लेकिन अगर समाज और सरकार मिलकर काम करें तो इस आफ़त को हराया जा सकता है।


