नशे से उभरने की कहानियां भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान की जमीनी प्रभावशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण

पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान ने अब सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहकर पुनर्वास और रोजगार पर भी जोर दिया है. भगवंत मान सरकार की इस व्यापक रणनीति के कारण कई युवा नशे की दलदल से बाहर निकलकर स्थिर जीवन की ओर लौट रहे हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान ने अब सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहकर पुनर्वास और रोजगार पर भी जोर दिया है. भगवंत मान सरकार की इस व्यापक रणनीति के कारण कई युवा नशे की दलदल से बाहर निकलकर स्थिर जीवन की ओर लौट रहे हैं. नशा पीड़ितों की रिकवरी में रोजगार को अहम भूमिका मिल रही है, जो न सिर्फ आर्थिक स्थिरता दे रहा है बल्कि सम्मान और परिवार से जुड़ाव भी बहाल कर रहा है. तीन युवाओं की सच्ची कहानियां इस बदलाव को साफ दर्शाती हैं.

कैसे नौकरी ने बदली जिंदगी?

अभिषेक कुमार (नाम बदला गया) कुछ साल पहले नशे की वजह से पूरी तरह टूट चुके थे. रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो गए थे और परिवार डर रहा था कि वह नशे की भेंट चढ़ जाएंगे. आज वह एक स्थिर नौकरी कर रहे हैं और परिवार के साथ फिर से जुड़ गए हैं. उन्होंने कहा, नौकरी दोबारा मिलने से सब कुछ बदल गया. इसने मुझे सही रास्ता अपनाने का कारण दिया.

 मां का साथ और रोजगार की ताकत

नवदीप कुमार (नाम बदला गया) के लिए बदलाव उनके घर से ही शुरू हुआ. लगातार झगड़ों और भावनात्मक दूरी ने उन्हें नशे के नुकसान का एहसास कराया. उन्होंने कहा, मेरी मां मुझे सही रास्ते पर वापस लेकर आई है. इलाज पूरा होने के बाद उन्हें रोजगार सहायता मिली और अब वह निजी क्षेत्र में काम कर रहे हैं. नवदीप रोजगार को जीवन में अनुशासन और मकसद लौटाने वाला पल बताते हैं.

 परिवार और स्वास्थ्य दोनों वापस

गुरजिंदर सिंह (नाम बदला गया) की कहानी रिकवरी के दूसरे पहलू को दिखाती है. नशे ने उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ परिवार में आर्थिक स्थिरता और भरोसे को भी खत्म कर दिया था. पुनर्वास सेवाओं और माता-पिता के निरंतर समर्थन से वे धीरे-धीरे ठीक हुए. आज वह फिर से नौकरी कर रहे हैं, उनकी सेहत सुधरी है और पारिवारिक रिश्ते भी बेहतर हो गए हैं.

सरकार की रणनीति: रिकवरी के साथ रोजगार

‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के तहत पुनर्वास, परामर्श और संरचित सहायता को रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है. अधिकारी मानते हैं कि आर्थिक स्थिरता के बिना रिकवरी अधूरी रहती है. सभी मामलों में साफ देखा गया है कि रोजगार केवल रिकवरी के बाद का कदम नहीं, बल्कि नशा-मुक्त जीवन की मजबूत नींव है. एक स्थिर नौकरी वित्तीय स्वतंत्रता, सम्मान और परिवार-समाज से जुड़ाव बहाल करती है.

अभिषेक ने आखिर में कहा, कभी भी नशों का सेवन न करें. यह नुकसानदेय लग सकता है, लेकिन यह सब कुछ बर्बाद कर सकता है. जैसे-जैसे यह अभियान आगे बढ़ रहा है, नशा पीड़ितों की ये कहानियां साबित कर रही हैं कि रिकवरी अब अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक स्थिर, सम्मानजनक और सार्थक जीवन की शुरुआत है.

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