थरूर बोले पाकिस्तान की शांति पहल पर मनाओ जश्न, विपक्ष-सरकार आमने सामने, कूटनीति पर छिड़ी तीखी जंग
ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर शशि थरूर का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि शांति की कोशिशों का स्वागत होना चाहिए। इससे नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता का जश्न मनाना चाहिए। उनका कहना है कि शांति हर देश के लिए जरूरी है। अगर कोई देश शांति के लिए काम करता है तो उसका स्वागत होना चाहिए। यह बयान सामने आते ही चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने इसे अलग नजरिए से देखा।
क्या पाकिस्तान की क्या भूमिका रही?
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे तनाव के बाद युद्धविराम हुआ। इसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। लगातार बातचीत के जरिए दोनों देशों को समझौते पर लाया गया। 10 सूत्रीय योजना के तहत यह समझौता हुआ। हालांकि यह युद्धविराम फिलहाल सीमित समय के लिए है। लेकिन इससे तनाव कुछ कम हुआ है।
क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?
थरूर से जब यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। हर घटना नुकसान या फायदा नहीं होती। अगर पाकिस्तान शांति की दिशा में काम कर रहा है तो यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि भारत भी शांति चाहता है। इसलिए इसे सकारात्मक नजर से देखना चाहिए।
क्या भारत सरकार का रुख क्या है?
थरूर ने भारत सरकार के रुख की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने सही कदम उठाया है। शांति का स्वागत करना जरूरी था। यह संतुलित और समझदारी भरा फैसला है। उन्होंने कहा कि भारत को संयम रखना चाहिए। साथ ही वैश्विक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
क्या कांग्रेस ने क्या सवाल उठाए?
दूसरी तरफ कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी नेता जयराम रमेश ने तंज कसा। उन्होंने पूछा कि भारत की भूमिका कहां थी। उन्होंने कहा कि सरकार पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफल नहीं रही। यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर गया।
क्या विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी किया। इसमें युद्धविराम का स्वागत किया गया। कहा गया कि इससे क्षेत्र में शांति आएगी। साथ ही बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया गया। मंत्रालय ने कहा कि संघर्ष से लोगों को काफी नुकसान हुआ है।
क्या आगे क्या असर होगा?
इस पूरे मामले से नई बहस शुरू हो गई है। पाकिस्तान की भूमिका पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। भारत के लिए यह कूटनीतिक चुनौती भी है। आने वाले दिनों में इस पर और चर्चा होगी। फिलहाल सबकी नजर पश्चिम एशिया के हालात पर है।


