कर्नाटक में कुर्सी पर घमासान के बीच सिद्धारमैया का बड़ा बयान, 'जो पार्टी कहेगी.....मानूंगा'
कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि वह केवल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का पालन करेंगे.

कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का पालन करेंगे. हावेरी में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह पहले ही अपनी स्थिति साफ कर चुके हैं और बार-बार इस पर प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं है.
नेतृत्व परिवर्तन को लेकर क्या बोले सिद्धारमैया?
उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टी हाईकमान उन्हें बुलाएगा, तभी वह दिल्ली जाएंगे और वहीं आगे की चर्चा होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस एक अनुशासित संगठन है, जहां अंतिम निर्णय हाईकमान ही लेता है और सभी नेताओं को उसका सम्मान करना चाहिए. उन्होंने दोहराया कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जो भी फैसला होगा, वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा तय किया जाएगा और वह उसी का पालन करेंगे. उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि एक ही सवाल को बार-बार न दोहराया जाए, क्योंकि वह इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं.
सिद्धारमैया ने अपनी सरकार के प्रदर्शन का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी सरकार ने चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में गंभीरता से काम किया है. उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग 1000 दिनों में सरकार ने गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है और आने वाले समय में भी सरकार इसी लक्ष्य पर काम करती रहेगी.
राजनीतिक सूत्रों का क्या कहना है?
इस बीच, राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि 17 फरवरी के बाद राज्य की राजनीति में गतिविधियां तेज हो सकती हैं. संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दिल्ली बुलाया जा सकता है. वहां दोनों नेताओं के साथ सत्ता संतुलन और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर चर्चा हो सकती है. इसके अलावा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों से भी अलग-अलग बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश की जा सकती है.
कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व को लेकर अंदरूनी चर्चाएं चल रही हैं. ऐसे में सिद्धारमैया का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके इस बयान से यह संदेश गया है कि वह पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे और किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहते हैं. इससे आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.


