ममता बनर्जी की याचिका पर CJI का करारा जवाब, कहा- SIR प्रक्रिया में कोई अड़चन पैदा नहीं करने देंगे

ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग के जवाब की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने SIR को लेकर सभी राज्यों को सख्त संदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई भी बाधा नहीं आने दी जाएगी.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सभी राज्यों को सख्त संदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई भी बाधा नहीं आने दी जाएगी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जहां जरूरत पड़ेगी, वहां सुधार के लिए आदेश जारी किए जाएंगे, लेकिन कोई अड़चन पैदा करने की कोशिश नहीं सहन की जाएगी. ये बातें पश्चिम बंगाल में SIR मामले की सुनवाई के दौरान कही गई है. 

ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग के जवाब की सुनवाई कर रहा है. ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे SIR को चुनौती दी है. उन्होंने दावा किया कि 1.36 करोड़ मतदाताओं के नाम छोटी-मोटी गलतियों जैसे उपनाम की स्पेलिंग गलत होना या शादी के बाद बेटियों के पते में बदलाव जैसी वजहों से हटाए जा सकते हैं.

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि राज्य में तैनात 8,300 माइक्रो ऑब्जर्वर्स केंद्र सरकार के अधिकारी हैं और वे बिना अधिकार के मतदाताओं के नाम हटा रहे हैं.

कोर्ट ने पूछे अहम सवाल

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं. उन्होंने राज्य सरकार से कई सवाल किए. कोर्ट ने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल में कोई ऐसा अधिकारी है जिससे पूछताछ की जा सके. याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान प्रधान सचिव मनोज पंत कोर्ट में मौजूद हैं.

कोर्ट ने ईआरओ की लिस्ट पर फोकस किया. मनोज पंत ने बताया कि 292 ग्रुप ए ईआरओ के नाम भेज दिए गए हैं, जिनमें एसडीएम रैंक के अधिकारी और कुछ आईएएस भी शामिल हैं. कुल 8,525 सहायक ईआरओ हैं. उन्होंने कहा कि इनकी तैनाती से पहले चुनाव आयोग को सूचना दी गई थी. 

राज्यों को साफ चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि असली समस्या यह है कि क्या सभी ग्रुप ए ईआरओ के नाम उपलब्ध हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी और कोई बाधा नहीं बर्दाश्त की जाएगी. ये मैसेज सभी राज्यों के लिए है कि चुनाव आयोग की इस महत्वपूर्ण कवायद में सहयोग करें.

यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जहां मतदाता सूची की साफ-सफाई पर विवाद है. कोर्ट हर पहलू की जांच कर रहा है ताकि सही मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें.

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