IAS माता-पिता के बच्चों को आरक्षण क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक और शैक्षिक रूप से संपन्न परिवारों की अगली पीढ़ी को लगातार आरक्षण का लाभ मिलना उचित नहीं हो सकता. कोर्ट ने कहा कि आरक्षण का फायदा वास्तविक जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुंचना चाहिए.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पिछड़े वर्गों में क्रीमी लेयर को मिलने वाले आरक्षण लाभों को लेकर अहम टिप्पणी की. अदालत ने सवाल उठाया कि आर्थिक और शैक्षिक रूप से संपन्न हो चुके परिवारों की अगली पीढ़ी को क्या लगातार आरक्षण का फायदा मिलता रहना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि जब परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में पहुंच चुका हो, तब आरक्षण की जरूरत पर दोबारा विचार होना चाहिए.

कुरुबा समुदाय के उम्मीदवार से जुड़ा मामला  

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान की. मामला कर्नाटक के कुरुबा समुदाय के एक उम्मीदवार से जुड़ा था, जिसे राज्य में पिछड़ा वर्ग श्रेणी II(A) में रखा गया है. उम्मीदवार का चयन कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड में सहायक अभियंता के पद पर हुआ था, लेकिन जिला जाति एवं आय सत्यापन समिति ने उसे उच्च आय वर्ग से संबंधित मानते हुए जाति वैधता प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार कर दिया.

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से समाज में व्यक्ति की स्थिति बदलती है और सामाजिक गतिशीलता आती है. उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता दोनों आईएएस अधिकारी हैं, अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं और समाज में मजबूत स्थिति रखते हैं तो फिर उनकी अगली पीढ़ी को आरक्षण की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए.

अदालत ने क्या कहा? 

अदालत ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को मुख्यधारा में लाना है. लेकिन यदि कोई परिवार आरक्षण का लाभ लेकर पहले ही उच्च शिक्षा और बेहतर सरकारी पद हासिल कर चुका है तो यह देखना जरूरी है कि क्या उनकी अगली पीढ़ी अब भी उसी श्रेणी में आती है या नहीं.

जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि सामाजिक पिछड़ापन एक वास्तविक समस्या है, लेकिन जब किसी परिवार की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति मजबूत हो जाती है तब आरक्षण की पात्रता पर पुनर्विचार होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने क्रीमी लेयर और आरक्षण व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अदालत ने संकेत दिया कि आरक्षण नीति का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुंचे, इसके लिए समय-समय पर पात्रता की समीक्षा जरूरी है.

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