ऑनलाइन पेमेंट करना होगा और सुरक्षित! जानिए क्या है डबल ओटीपी वाला नया नियम

साइबर फ्रॉड ऑनलाइन बैंकिंग स्कैम और खासकर 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे मानसिक दबाव वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एक बेहद अनोखा सुरक्षा कवच तैयार किया गया है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: देश में पैर पसार रहे साइबर फ्रॉड ऑनलाइन बैंकिंग स्कैम और खासकर 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे मानसिक दबाव वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एक बेहद अनोखा सुरक्षा कवच तैयार किया गया है. साइबर अपराधियों के निशाने पर सबसे ज्यादा रहने वाले सीनियर सिटीजन्स के बैंक खातों को सुरक्षित रखने के लिए 'डबल ओटीपी सिस्टम' की शुरुआत की गई है.

नया टू-स्टेप वेरिफिकेशन

 रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा पुलिस और एचडीएफसी बैंक ने मिलकर इस बेहद सुरक्षित और व्यावहारिक तकनीकी प्रणाली को पेश किया है. अक्सर बुजुर्ग लोग तेजी से बदलती डिजिटल तकनीक और चालाक ठगों के झांसे में आ जाते हैं. कई मामलों में तो ठग केवल एक ओटीपी हासिल करके या डरा-धमकाकर कुछ ही मिनटों में पूरा अकाउंट साफ कर देते हैं. इस गंभीर समस्या को रोकने के लिए ही यह नया टू-स्टेप वेरिफिकेशन सिस्टम लाया गया है.

क्या है यह डबल ओटीपी सिस्टम और क्यों है खास?

यह नया सिस्टम ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजैक्शन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त मानवीय और तकनीकी दीवार  खड़ी करता है. पारंपरिक व्यवस्था में पैसे ट्रांसफर करने के लिए सिर्फ एक ओटीपी की जरूरत होती है, जो खाताधारक के फोन पर आता है. लेकिन नए सिस्टम के तहत बड़े या संदिग्ध ट्रांजैक्शन को पूरा करने के लिए केवल एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग ओटीपी वेरिफाई करने होंगे.

डिजिटल अरेस्ट का खतरा

अक्सर देखा गया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे घिनौने घोटालों में ठग बुजुर्गों को कानूनी डर दिखाकर समाज या परिवार से पूरी तरह अलग-थलग कर देते हैं और उनसे जबरन ओटीपी ले लेते हैं. ऐसे समय में पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था फेल हो जाती है. यह नया सिस्टम इसी मनोवैज्ञानिक दबाव की कड़ी को तोड़ने का काम करता है.

कैसे काम करेगा सुरक्षा का यह नया चक्र?

यदि कोई सीनियर सिटीजन अपने खाते से कोई बड़ा ऑनलाइन लेन-देन या फंड ट्रांसफर शुरू करता है, तो प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी. पहला स्टैंडर्ड ओटीपी हमेशा की तरह बुजुर्ग खाताधारक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा. पहला ओटीपी दर्ज होने के बाद सिस्टम एक पॉज लेगा.

पैसा खाते से नहीं होगा ट्रांसफर

इसके बाद एक दूसरा अनिवार्य ओटीपी या अप्रूवल कॉल खाताधारक द्वारा पहले से नामांकित किसी विश्वसनीय संपर्क जैसे उनके बेटे, बेटी, जीवनसाथी या किसी करीबी रिश्तेदार के मोबाइल नंबर पर जाएगा. जब तक ये दोनों ओटीपी बैंक के सिस्टम में सही-सही दर्ज नहीं किए जाएंगे तब तक पैसा खाते से ट्रांसफर नहीं हो सकेगा.

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई शुरुआत

यह अनूठी सुविधा 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पूरी तरह स्वैच्छिक है. फिलहाल इसे एचडीएफसी बैंक द्वारा हरियाणा के गुरुग्राम और पंचकुला जैसे क्षेत्रों में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है. इस सिस्टम की सफलता को देखते हुए देश के अन्य प्रमुख बैंक भी इसे अपनाने की तैयारी में हैं, ताकि बुजुर्गों पेंशनभोगियों और अकेले रहने वाले लोगों की गाढ़ी कमाई को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके. अब यदि ठग किसी तरह पहला ओटीपी हासिल कर भी लेते हैं तो भी वे परिवार के दूसरे सदस्य की अनुमति के बिना चोरी नहीं कर पाएंगे.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो