शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें, यौन शोषण के आरोपों के खिलाफ दर्ज होगी FIR...कोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ नाबालिग बच्चो के साथ यौन शोषण करने के आरोप में एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक अत्यंत गंभीर और अभूतपूर्व कानूनी संकट के भंवर में घिर गए हैं. एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने उनके और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के सनसनीखेज आरोपों पर मुकदमा दर्ज करने का बेहद सख्त निर्देश दिया है. आश्रम में रहने वाले नाबालिग बच्चों के साथ कथित तौर पर हुए दुव्र्यवहार और अश्लीलता के इस मामले ने पूरे देश के धार्मिक और सामाजिक हलकों में जबरदस्त हलचल मचा दी है.

अदालत का ऐतिहासिक निर्देश

एडीजे पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अपना बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने झूंसी थाना पुलिस को स्पष्ट निर्देशित किया है कि दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ बिना किसी विलंब के एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की निष्पक्ष विवेचना की जाए. इस आदेश के बाद अब पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है क्योंकि यह मामला एक प्रभावशाली धार्मिक गुरु से जुड़ा है. इस न्यायिक निर्देश को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए बड़ी मुश्किल माना जा रहा है.

आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका

इस पूरे विवाद की जड़ शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर की गई एक महत्वपूर्ण याचिका है. उन्होंने 28 जनवरी को धारा 173(4) के तहत अदालत में गुहार लगाई थी कि आश्रम के भीतर अबोध नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया जा रहा है. आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने गंभीर दावों की पुष्टि के लिए अदालत को एक संदिग्ध सीडी भी साक्ष्य के तौर पर सौंपी है. उनका सीधा आरोप है कि विद्या मठ में बच्चों की सुरक्षा के साथ वर्षों से बड़ा खिलवाड़ और क्रूरता हो रही है.

नाबालिगों के वीडियोग्राफ्ड बयान

कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत 13 फरवरी को इस पूरे मामले में एक अहम मोड़ आया था. यौन शोषण का आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत परिसर में पूरी गोपनीयता और वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए थे. कोर्ट ने न केवल इन बयानों को गंभीरता से सुना बल्कि पुलिस द्वारा पेश की गई प्रारंभिक रिपोर्ट का भी बारीकी से अध्ययन किया. लंबी सुनवाई और दोनों पक्षों के तर्कों को गहराई से सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जो अब आदेश के रूप में सामने आया है.

पीड़ित बच्चों के लिए न्याय की पहली जीत

अदालत के आदेश पर अपनी गहरी संतुष्टि व्यक्त करते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी ने इसे पीड़ित बच्चों के लिए न्याय की पहली जीत बताया है. उन्होंने कहा कि मासूमों के साथ हो रहे अन्याय को रोकना ही उनका एकमात्र पवित्र लक्ष्य था. अपनी लड़ाई को और व्यापक बनाते हुए उन्होंने घोषणा की है कि वे प्रयागराज से वाराणसी के विद्या मठ तक एक विशाल पैदल 'सनातन यात्रा' निकालेंगे. इस यात्रा के माध्यम से वे आम भक्तों के सामने उन तथ्यों को रखेंगे जो अब तक आश्रम की दीवारों में कैद थे.

आश्रम पर मंडराता संकट

शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई होना एक बड़ी सामाजिक घटना है. आने वाले समय में जांच टीम विद्या मठ और संबंधित अन्य आश्रमों में साक्ष्य एकत्रित करने के लिए छापेमारी कर सकती है. एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की संभावित गिरफ्तारी की चर्चाएं भी काफी तेज हो गई हैं. समाज की नजर अब झूंसी पुलिस की कार्यप्रणाली और भविष्य में होने वाली कानूनी कार्यवाहियों पर टिकी हुई है जो जल्द शुरू की जाएंगी.

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