'पाकिस्तान से बातचीत जरूरी, सर्जिकल स्ट्राइक नहीं...,' मणिशंकर अय्यर ने कबाब के उदाहरण से क्या समझाया?
पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर एक बड़ी दिलचस्प बात कही है. उनका मानना है कि दोनों देशों के लोगों की भाषा, सोच और संस्कृति इतनी समान है कि आपस में बात करना बेहद आसान हो जाता है. उन्होंने शांतिपूर्ण संवाद को कभी न छोड़ने की सलाह दी, भले ही इसमें वक्त लगे. साथ ही उन्होंने मौजूदा सरकार की इच्छाशक्ति पर भी सवाल उठाए.

पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर एक अहम बयान दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच बातचीत सबसे आसान हो सकती है क्योंकि उनकी भाषा, सोच औ र संस्कृति काफी हद तक एक जैसी है. यह टिप्पणी राजस्थान के जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई जहां अय्यर ने दोनों देशों के नागरिकों के आपसी समझ को रेखांकित किया.
अय्यर ने जोर देकर कहा कि भारतीय और पाकिस्तानी एक-दूसरे को आसानी से समझ सकते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अगर किसी अमेरिकी से कबाब का जिक्र किया जाए तो शायद उसे समझ ही न आए लेकिन भारत और पाकिस्तान के लोग ऐसी चीजों को अच्छी तरह समझते हैं. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि भारत अमेरिका और इजराइल के इतना करीब क्यों हो गया है और रूस पर इतना निर्भर क्यों है.
पाक से आमने-सामने बैठकर बात करनी होगी- अय्यर
अय्यर ने सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सच में हिम्मत है तो आमने-सामने बैठकर बातचीत करनी चाहिए. उनके मुताबिक भारत और पाकिस्तान को अपनी शिकायतों और मतभेदों पर लगातार बातचीत जारी रखनी चाहिए. बातचीत की प्रक्रिया लंबी हो सकती है जिसमें दोनों देश एक-दूसरे की गलतियों का जिक्र करेंगे लेकिन संवाद जारी रखना ही समस्या का समाधान निकालने का रास्ता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में पाकिस्तान से लगातार बातचीत करने की पर्याप्त इच्छा नहीं दिखती. इस प्रक्रिया में महीनों लग सकते हैं. वे आपकी की गई गलतियों को बार-बार दोहराते रहेंगे जबकि हम उनके किए गए गलत कामों को गिनाते रहेंगे. यह सब पहलगाम से लेकर 1947 तक का हिसाब-किताब होगा. इसलिए हमें उनसे लगातार बातचीत करते रहना चाहिए.
#WATCH | Jaipur, Rajasthan: Former Union Minister Mani Shankar Aiyar says, "According to my experience, I can say that it is the easiest thing for a Hindu or for an Indian to talk to a Pakistani because the language is the same, the mindset is the same, and the culture is, by and… pic.twitter.com/fy7zvNZsnE
— ANI (@ANI) March 14, 2026
हम रूस पर निर्भर क्यों हैं- मणिशंकर अय्यर
मेरे अनुभव के अनुसार, मैं कह सकता हूं कि किसी हिंदू या किसी भारतीय के लिए किसी पाकिस्तानी से बात करना सबसे आसान काम है, क्योंकि भाषा एक ही है, सोच एक ही है, और संस्कृति भी, मोटे तौर पर, एक ही है. हम एक-दूसरे को पूरी तरह समझते हैं. हो सकता है कि उनके कबाब हमारे कबाब से बेहतर हों. लेकिन हम निश्चित रूप से एक दोस्ताना मुकाबला कर सकते हैं.
यह बहस करते हुए कि, ‘नहीं, हमारे कबाब तुम्हारे कबाब से बेहतर हैं.’ अगर आप किसी अमेरिकी से ‘कबाब’ का जिक्र करें, तो क्या उन्हें कोई अंदाजा होगा कि आप किस बारे में बात कर रहे हैं? बिल्कुल नहीं. हम अमेरिकियों को क्यों अपना रहे हैं? हम अचानक इजराइल के इतने करीबी सहयोगी क्यों बन गए हैं? हम रूस पर इतने ज्यादा निर्भर क्यों हैं?


