गणतंत्र दिवस पर आतंक का साया! खालिस्तानी, जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा जैसे संगठनों के निशाने पर कई शहर
नई दिल्ली समेत बड़े शहरों में गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी, जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा के संभावित हमले की चेतावनी दी. AI, फेस रिकग्निशन और मल्टी-लेयर सुरक्षा के साथ 20,000 जवान तैनात हैं.

नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली समेत देश के बड़े शहरों में गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है. खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि खालिस्तानी आतंकी संगठन, जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा के सदस्य गणतंत्र दिवस पर हमला करने की साजिश में हैं. इसके साथ ही बांग्लादेश स्थित आतंकी संगठन भी हमले की फिराक में हैं. खुफिया विभाग ने बताया कि पंजाब के कुछ गैंगस्टर विदेश में बैठे कट्टरपंथी और खालिस्तानी हैंडलरों के साथ मिलकर इस योजना को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं.
सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये गैंगस्टर हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय हैं और उनके पास देशी और विदेशी हथियारों की बड़ी खेप मौजूद है. खुफिया इनपुट में कहा गया है कि विदेशी हैंडलर इन गैंगस्टरों के नेटवर्क का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां और अर्धसैनिक बल सुरक्षा को और कड़ा कर रहे हैं.
AI तकनीक से सुसज्जित सुरक्षा
इस बार गणतंत्र दिवस की सुरक्षा में तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया है. पुलिसकर्मियों को AI से लैस स्मार्ट चश्मे दिए गए हैं, जो संदिग्धों को पहचानते ही अलर्ट भेजेंगे. फेस रिकग्निशन कैमरे पूरे परेड रूट और नई दिल्ली के 31 सीसीटीवी कंट्रोल रूम से जुड़े हैं. इनमें 1000 हाई-डेफिनेशन कैमरे लगाए गए हैं. सिस्टम में केवल संदिग्ध आतंकियों और अपराधियों के फोटो ही नहीं, बल्कि अज्ञात व्यक्तियों पर भी अलर्ट आएगा.
मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था
नई दिल्ली एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस देवेश महला ने बताया कि परेड रूट की सुरक्षा के लिए कुल 20,000 जवान तैनात हैं. सुरक्षा व्यवस्था को तीन मुख्य लेयर में बांटा गया है.
पहली लेयर: कर्तव्य पथ के बाहरी सुरक्षा घेरे में 15,000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल, बम डिस्पोजल, ट्रैफिक टीम और क्विक रिस्पॉन्स टीम शामिल हैं.
दूसरी लेयर: अर्धसैनिक बलों की तैनाती, राष्ट्रपति भवन से लेकर लाल किले तक रणनीतिक पॉइंट्स पर सुरक्षा.
तीसरी लेयर: एनएसजी कमांडो, सेना और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारी, जो वीवीआईपी और अतिथियों की सुरक्षा के साथ आसपास की गतिविधियों पर नजर रखेंगे.
सेंट्रल कमांड और ड्रोन सुरक्षा
एक सेंट्रल कमांड रूम बनाया गया है, जो पूरे शहर की निगरानी करता है. एनएसजी का डॉग स्क्वायड भी सुरक्षा में तैनात रहेगा. परेड रूट के आसपास की ऊंची इमारतों को 25 जनवरी से खाली कर दिया जाएगा और 100 से अधिक स्नाइपर तैनात किए जाएंगे. ड्रोन या अन्य उड़ने वाली वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. इसके अलावा एंटी-ड्रोन और एंटी-एयरक्राफ्ट गन भी तैनात की गई हैं.
फेस रिकग्निशन और हाईटेक निगरानी
सीसीटीवी कैमरे 50,000 संदिग्धों और आतंकियों की फोटो से जुड़े हैं. किसी भी व्यक्ति का चेहरा मैच होते ही पुलिस को तुरंत अलर्ट मिलेगा. कैमरों को इस तरह से रणनीतिक स्थानों पर रखा गया है कि उनका पकड़ से बचना लगभग असंभव है. पुलिस ने कर्तव्य पथ पर कई मॉक ड्रिल भी कर ली हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके.


