संविधान में सबको समान अधिकार लेकिन भारत का प्रधानमंत्री हमेशा हिंदू ही होगा, ओवैसी के बयान पर हिमंता बिस्वा सरमा का पलटवार

असदुद्दीन ओवैसी के हिजाब वाली महिला को प्रधानमंत्री बनाने के बयान पर सरमा से तीखी बहस छिड़ी. संविधान, धर्म और नेतृत्व को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई, जिसमें भाजपा ने भी हस्तक्षेप किया और समावेशिता पर सवाल उठाए.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बीच एक बयान को लेकर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है. यह विवाद तब शुरू हुआ, जब ओवैसी ने एक चुनावी सभा में हिजाब पहनने वाली महिला को भारत का प्रधानमंत्री बनने का सपना व्यक्त किया. इस बयान के बाद देश की राजनीति में संविधान, धर्म और नेतृत्व को लेकर नई बहस छिड़ गई.

संविधान की समावेशी भावना पर ओवैसी का जोर

शनिवार को महाराष्ट्र के सोलापुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने भारतीय संविधान का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है. पाकिस्तान के संविधान से तुलना करते हुए ओवैसी ने कहा कि वहां प्रधानमंत्री बनने के लिए धर्म की शर्त है, जबकि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या महापौर बन सकता है. इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बने.

हिमंता बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया

ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि संविधान में किसी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने का प्रावधान नहीं है, लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र और हिंदू सभ्यता पर आधारित देश है. उन्होंने यह भी कहा कि उनका विश्वास है कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा हिंदू ही होगा. सरमा के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया.

ओवैसी का तीखा पलटवार

नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओवैसी ने सरमा की टिप्पणी पर कड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि सरमा संविधान की सही व्याख्या नहीं कर रहे हैं. ओवैसी ने दो टूक कहा कि संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि प्रधानमंत्री किसी विशेष धर्म से ही होना चाहिए. उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर देता है और भारत किसी एक समुदाय का देश नहीं है.

समावेशिता बनाम संकीर्ण सोच की बहस

ओवैसी ने आगे कहा कि भारत की खूबसूरती उसकी विविधता में है और यह देश उन लोगों के लिए भी है जो ईश्वर में विश्वास नहीं रखते. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं की सोच संकीर्ण है, इसी कारण वे संविधान की मूल भावना को समझने में असफल रहते हैं. इस बयान के साथ ही यह बहस केवल राजनीति तक सीमित न रहकर सामाजिक और वैचारिक स्तर पर भी पहुंच गई.

भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया

इस विवाद में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी कूद पड़े. उन्होंने ओवैसी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में समावेशिता में विश्वास रखते हैं, तो पहले किसी पसमांदा मुस्लिम या हिजाब पहनने वाली महिला को एआईएमआईएम का अध्यक्ष बनाकर दिखाएं. सोशल मीडिया पर उनका यह बयान तेजी से वायरल हुआ.

चुनावी माहौल में बयानबाजी तेज

यह पूरा विवाद ऐसे समय पर सामने आया है, जब मुंबई में होने वाले नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है. इस बीच ओवैसी ने यूपीए सरकार के दौरान गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम में हुए संशोधनों पर भी एक बार फिर सवाल उठाए और कांग्रेस पर विचाराधीन कैदियों के साथ अन्याय का आरोप लगाया.

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