कोलकाता हाईकोर्ट में टली सुनवाई, ED सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंची याचिका, जानें अब तक I-PAC केस में क्या-क्या हुआ?

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और ममता बनर्जी ने आई-पीएसी कोयला घोटाला जांच में बाधा डाली. एजेंसी ने सीबीआई जांच की मांग की, जबकि टीएमसी और आई-पीएसी ने आरोपों को खारिज किया.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है. ईडी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि आई-पीएसी कोयला घोटाला मामले की जांच में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से लगातार बाधाएं डाली जा रही हैं. केंद्रीय एजेंसी ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

ईडी ने क्या आरोप लगाए?

ईडी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि राज्य सरकार के हस्तक्षेप के कारण वह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच नहीं कर पा रही है. एजेंसी का कहना है कि उसे कानूनी अधिकारों के तहत तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पूरी करने से रोका गया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं.

आई-पीएसी से जुड़े परिसरों पर छापेमारी का मामला

ईडी ने अदालत को बताया कि कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पीएसी से जुड़े ठिकानों पर तलाशी के दौरान गंभीर टकराव की स्थिति बनी. आई-पीएसी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने का काम करती है. एजेंसी का आरोप है कि तलाशी के दौरान वरिष्ठ राज्य अधिकारियों की मौजूदगी में जरूरी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जबरन हटाए गए.

राज्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप

केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि पुलिस कर्मियों और अन्य राज्य अधिकारियों की दखलअंदाजी न्याय में बाधा डालने के समान है. ईडी के मुताबिक, इस हस्तक्षेप से न सिर्फ जांच प्रभावित हुई बल्कि कानून के दायरे में काम कर रही एजेंसी के अधिकार भी सीमित कर दिए गए.

बंगाल सरकार की पहले से आपत्ति

ईडी की कार्रवाई से पहले ही पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर दी थी. इसमें मांग की गई थी कि राज्य का पक्ष सुने बिना ईडी को किसी तरह की अंतरिम राहत न दी जाए. राज्य सरकार का कहना था कि एकतरफा आदेश से उसके अधिकारों का हनन हो सकता है.

हवाला के जरिए पैसे ट्रांसफर का दावा

ईडी का दावा है कि कोयला तस्करी से जुड़े अपराध से प्राप्त करीब 10 करोड़ रुपये हवाला चैनलों के जरिए आई-पीएसी तक पहुंचाए गए. एजेंसी के अनुसार, यह रकम 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से चुनावी सेवाओं के भुगतान के रूप में दी गई थी.

कलकत्ता हाईकोर्ट में भी जारी है कानूनी लड़ाई

शुक्रवार को ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी. हालांकि, अदालत ने इस मामले की सुनवाई 14 जनवरी के बाद तक टाल दी. इसके जवाब में तृणमूल कांग्रेस और आई-पीएसी ने ईडी के आरोपों को चुनौती देते हुए जवाबी याचिकाएं दाखिल की हैं.

टीएमसी और आई-पीएसी का पलटवार

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेज सिर्फ चुनावी रणनीति और अभियान से जुड़े थे, जिनका धन शोधन निवारण अधिनियम से कोई लेना-देना नहीं है. पार्टी ने आरोप लगाया कि ईडी जांच की आड़ में गोपनीय राजनीतिक जानकारी हासिल करना चाहती है. वहीं आई-पीएसी प्रमुख प्रतीक जैन के परिवार ने भी तलाशी के दौरान दस्तावेजों की चोरी के आरोप लगाए हैं.

अब सुप्रीम कोर्ट की अहम भूमिका

ईडी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और नियमों के अनुरूप थी. अब मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है, जहां यह तय होगा कि केंद्रीय एजेंसियों को राज्यों में जांच के दौरान किस हद तक स्वतंत्रता और संरक्षण मिलना चाहिए.

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