महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा के तीन नेताओं ने किया बीजेपी की नाक में दम...अब पार्टी ने भेजा कारण बताओ नोटिस
हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान...ये वो तीन राज्य हैं जहां बीजेपी में बगावत देखी जा रही है. हरियाणा में अनिल विज, राजस्थान में किरोड़ी लाल मीणा तो महाराष्ट्र में पंकजा मुंडे बगावती मूड में हैं. पंकजा मुंडे ने कहा था कि 'मैं भाजपा की हूं, लेकिन भाजपा मेरी थोड़ी ही है. अगर कुछ नहीं मिला तो खेत में गन्ना काटने चली जाऊंगी.' अनिल विज मुख्यमंत्री पद न मिलने के कारण नाराज बताए जा रहे हैं, जबकि करोणी लाल मीणा अच्छे मंत्रीपद न मिलने से बगावती तेवर अपनाए हुए हैं.

हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान...ये वो तीन राज्य हैं जहां बीजेपी में बगावत देखी जा रही है. हरियाणा में अनिल विज, राजस्थान में किरोड़ी लाल मीणा तो महाराष्ट्र में पंकजा मुंडे बगावती मूड में हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर इन तीनों नेताओं की पार्टी से नाराजगी के कारण क्या हैं और पार्टी इनके इस बागी रुख पर कैसे एक्शन ले रही है.
पहले बात अनिल विज की
अनिल विज सीएम पद की महत्वाकांक्षा रखते हैं. पिछले कार्यकाल में मनोहर लाल खट्टर से उनके रिश्ते खराब रहे. अभी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ भी उनके रिश्ते खास अच्छे नहीं हैं. प्रदेश भाजपा प्रमुख बडोली ने विज को जारी नोटिस में कहा, ‘‘आपको सूचित किया जाता है कि आपने हाल ही में पार्टी (प्रदेश) अध्यक्ष (बडोली) और मुख्यमंत्री पद के खिलाफ सार्वजनिक बयान दिए हैं. ये गंभीर आरोप हैं और पार्टी की नीति और आंतरिक अनुशासन के खिलाफ हैं.'' बडोली ने कहा कि विज को नोटिस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशानुसार जारी किया जा रहा है. इसमें कहा गया, ‘‘हम आपसे तीन दिन के भीतर इस विषय पर लिखित स्पष्टीकरण देने की अपेक्षा करते हैं.
कारण बताओ नोटिस में विज से कहा गया कि उनका ‘‘कदम न केवल पार्टी की विचारधारा के खिलाफ है, बल्कि यह ऐसे समय में आया, जब पार्टी पड़ोसी राज्य (दिल्ली) में चुनाव प्रचार कर रही थी.'' नोटिस में कहा गया, ‘‘चुनाव के समय, एक सम्मानित मंत्री पद पर रहते हुए, आपने यह जानते हुए भी ये बयान दिए हैं कि इससे पार्टी की छवि धूमिल होगी. यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है.'
7वीं बार जीतें हैं विधानसभा चुनाव
अंबाला छावनी से सात बार के विधायक विज लगातार सैनी पर निशाना साध रहे थे. हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को तवज्जो नहीं दी और दावा किया था कि ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री नाराज नहीं हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते उन्हें अपनी बात कहने का अधिकार है. पिछले सप्ताह विज ने कुछ तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें दावा किया गया था कि सैनी के एक ‘‘मित्र'' के साथ देखे गए ‘‘कार्यकर्ता'' एक निर्दलीय उम्मीदवार के साथ भी देखे गए थे, जिसे उन्होंने 2024 में राज्य विधानसभा चुनाव में हराया था.
मुख्यमंत्री पर किया था कटाक्ष
विज ने अक्टूबर में अपने अंबाला कैंट निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव जीता था और निर्दलीय उम्मीदवार चित्रा सरवारा को हराकर सातवीं बार विधायक बने थे. विज ने 31 जनवरी को कहा कि उन्हें चुनाव में हराने की कोशिश करने वाले अधिकारियों सहित उन लोगों के मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाए हुए 100 दिन से अधिक हो गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. विज ने सैनी पर कटाक्ष करते हुए कहा था, ‘‘पदभार संभालने के बाद से वह (सैनी) ‘उड़न खटोला' (हेलीकॉप्टर) पर सवार हैं. अगर वह नीचे आए, तो उन्हें लोगों की पीड़ा दिखाई देगी.''
प्रदेश अध्यक्ष से कर दी इस्तीफे की डिमांड
30 जनवरी को विज ने अधिकारियों द्वारा उनके आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी और कहा था कि अपने अंबाला कैंट निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की खातिर वह किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की तरह आमरण अनशन पर जाने के लिए तैयार हैं.
इससे पहले विज ने कहा था कि बलात्कार के मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद बडोली को हिमाचल प्रदेश पुलिस की जांच में निर्दोष पाए जाने तक पार्टी की ‘‘शुचिता'' बनाए रखने के लिए हरियाणाा प्रदेश भाजपा प्रमुख के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
पंकजा मुंडे ने दी अलग पार्टी बनाने की धमकी
पंकजा मुंडे बीजेपी के दिग्गज नेता रहे गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं. गोपीनाथ मुंडे का 2014 में एक सड़क हादसे में निधन हो गया था. करीब एक साल पहले की बात की है. पंकजा मुंडे ने कहा था कि 'मैं भाजपा की हूं, लेकिन भाजपा मेरी थोड़ी ही है. अगर कुछ नहीं मिला तो खेत में गन्ना काटने चली जाऊंगी.' ताजा विवाद तब गहरा गया जब पंकजा मुंडे ने यह कहकर एक नई बहस छेड़ दी कि अगर उनके पिता के समर्थक इकट्ठे हो जाएं, तो वे एक नई पार्टी का गठन कर सकती हैं. रविवार को नासिक में स्वामी समर्थ केंद्र के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, पंकजा मुंडे ने स्पष्ट किया कि उनके पिता के समर्थकों के पास इतनी प्रभावी संख्या और ताकत है कि वे एक अलग राजनीतिक दल का रूप बना सकते हैं.
नाराजगी का क्या कारण है
गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद पंकजा मुंडे को सियासी बुलंदी नहीं मिल पाई, जिसकी उम्मीदें लगा रखी थीं. 2014 में राज्य में सरकार बनी तो मुख्यमंत्री का पद देवेंद्र फडणवीस को मिला और उन्हें मंत्री पद से ही संतोष करना पड़ा. 2014 में देवेंद्र फडणवीस की सरकार में पंकजा मुंडे कैबिनेट मिनिस्टर बनाई गई थीं. उन दौरान उनके ऊपर चिक्की घोटाला का आरोप भी लगा था.
साल 2019 के विधानसभा चुनाव में पंकजा मुंडे बीड के परली से विधानसभा का चुनाव हार गई थीं. तब यह आरोप लगाया गया कि उनके उनकी हार के लिए पार्टी के ही कुछ नेताओं ने साजिश रची थी. महाराष्ट्र में बीजेपी के पास कई ऐसे मौके आए जब लगा कि पकंजा मुंडे को विधान परिषद या फिर राज्यसभा में भेजा जा सकता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
2023 में पंकजा मुंडे की चीनी फैक्ट्री पर जीएसटी का पड़ा था छापा
पंकजा मुंडे के स्वामित्व वाली एक चीनी फैक्ट्री पर 14 अप्रैल 2023 को जीएसटी के अधिकारियों ने छापा मारा. छापेमारी के बाद पंकजा मुंडे ने बयान दिया था कि जीएसटी अधिकारियों से बात की और मैंने उनसे पूछा कि अचानक से ऐसा कदम क्यों उठाया गया, इसपर उनका जवाब था कि ऊपर से एक आदेश था.
महाराष्ट्र की सियासत में देवेंद्र फडणवीस को सियासी अहमियत मिलने और पंकजा मुंडे को दरकिनार किए जाना भी एक बड़ी नाराजगी की वजह बनी. पंकजा को लगता है कि बीजेपी उनकी ओबीसी राजनीतिक प्रभाव में दखल देती है और उनका प्रभाव कम कर रही है.
अब बात किरोड़ी लाल मीणा की
राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में हुई सरकार गठन के बाद से ही किरोड़ी लाल मीणा का बागी अंदाज देखा जा रहा है. वह आए दिन सरकार के खिलाफ मुखर रहते हैं. हाल ही में किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आमागढ में एक कार्यक्रम में बोलते हुए किरोड़ी लाल मीणा ने आरोपी लगाया कि पार्टी की सरकार अपने ही मंत्री के कॉल रिकॉर्ड करवा रही है. यही नहीं, पीछे सीआईडी लगाई जा रही है. किरोड़ी ने कहा कि आशा करता था कि राज बदलेगा तो भ्रष्टाचार पर नकेल लगेगी. मुंह का खाया नाक से निकालेंगे. लेकिन मैं निराश हूं. क्योंकि जो आंदोलन हमने किए, उसकी वजह से हम सत्ता में आए. उन मुद्दों पर कोई काम नहीं हो रहा है, उन्हें भुला दिया गया है.
नाराजगी की वजह
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा राज्य सरकार में अच्छा विभाग नहीं मिलने से शुरू से ही नाराज़ चल रहे हैं. अब ट्रांसफ़र पोस्टिंग में उनकी नहीं माने जाने से खुलकर बगावत के मूड में हैं. लोकसभा चुनाव में दौसा सीट हारने के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, मगर सरकार ने स्वीकार नहीं किया. विधानसभा उपचुनाव में किरोड़ी मीणा अपने छोटे भाई जगमोहन मीणा को दौसा से टिकट देने पर सरकार में वापस आ गए थे, लेकिन भाई के चुनाव हारने पर भीतरघात का आरोप लगाते हुए फिर से नाराज हो गए.


