गुरुग्राम से उठी चिंगारी, नोएडा में भड़का आंदोलन… NCR में फैला मजदूरों का गुस्सा; जानें कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ विरोध

गुरुग्राम के मानेसर से शुरू हुआ मजदूरों का विरोध अब नोएडा समेत पूरे एनसीआर में फैल चुका है. वेतन वृद्धि और श्रम सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है, जिससे कई शहरों में हालात प्रभावित हुए हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नोएडा: दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का विरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है. वेतन वृद्धि, महंगाई और श्रम सुविधाओं को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब नोएडा से निकलकर गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ तक फैल गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में असर देखने को मिल रहा है.

इस आंदोलन की शुरुआत 7 अप्रैल को हरियाणा के गुरुग्राम के मानेसर इलाके से हुई थी. धीरे-धीरे यह विरोध नोएडा और ग्रेटर नोएडा पहुंचा और अब कई जिलों में मजदूर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे यातायात और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं.

नोएडा में कब और कहां शुरू हुआ विरोध?

नोएडा में यह आंदोलन 9 अप्रैल को फेज-2 थाना क्षेत्र के होजरी कॉम्प्लेक्स से शुरू हुआ. यहां गारमेंट और होजरी यूनिट्स में काम करने वाले मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्रियों के बाहर एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए.

शुरुआती दिनों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, जहां मजदूरों ने नारेबाजी और संवाद के जरिए अपनी मांगें रखीं, लेकिन मांगों पर ठोस कार्रवाई न होने से असंतोष बढ़ता गया.

कब उग्र हुआ आंदोलन?

12 अप्रैल को ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 इलाके में स्थिति ने अचानक मोड़ लिया. मिंडा कंपनी के पास प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में गोली चलने की घटना सामने आई, जिसमें एक महिला मजदूर घायल हो गई.

यह घटना आंदोलन के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई और इसके बाद मजदूरों का गुस्सा खुलकर सामने आया.

सड़कों पर उतरे हजारों मजदूर

13 अप्रैल की सुबह नोएडा के फेज-2, सेक्टर-62 और एनएच-9 जैसे प्रमुख इलाकों में हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं, नारेबाजी की और कई जगह वाहनों को रोक दिया.

हालात बिगड़ने पर कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई, जिसके बाद हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए.

कई जिलों में दिखा असर

इस आंदोलन का असर अब नोएडा तक सीमित नहीं रहा. गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ में भी मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं. कई जगहों पर लंबा जाम लग गया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

क्या हैं मजदूरों की प्रमुख मांगें?

मजदूरों की मुख्य मांगों में न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह करना, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, समय पर वेतन, सैलरी स्लिप और बोनस को सीधे बैंक खाते में जमा करना शामिल है. उनका कहना है कि मौजूदा वेतन में महंगाई के बीच गुजारा करना मुश्किल हो गया है.

ट्रैफिक पर पड़ा बड़ा असर

प्रदर्शन के कारण दिल्ली-नोएडा बॉर्डर, सेक्टर-62, एनएच-24, डीएनडी फ्लाईवे और चिल्ला बॉर्डर जैसे प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया. कई जगह वाहनों की कतारें किलोमीटरों तक पहुंच गईं.

स्थिति को संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने रूट डायवर्जन लागू किया और लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी.

प्रशासन के निर्देश और हेल्पलाइन

गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने श्रमिकों के लिए कई निर्देश जारी किए हैं. इनमें 10 तारीख तक वेतन भुगतान, ओवरटाइम पर दोगुना वेतन, साप्ताहिक अवकाश और समय पर बोनस सुनिश्चित करना शामिल है.

इसके अलावा, कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति, शिकायत पेटी और कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है.

श्रमिकों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 120-2978231, 120-2978232, 120-2978862 और 120-2978702 जारी किए गए हैं, जहां उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने का आश्वासन दिया गया है.

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