हरियाणा का ‘वेतन वरदान’ बना नोएडा में बवाल की वजह, सड़कों पर फूट रहा गुस्सा

नोएडा में मजदूरों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू किया गया आंदोलन अब हिंसक हो गया है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में कामकाज ठप पड़ गया. हरियाणा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ने के बाद नोएडा के श्रमिक भी समान वेतन की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान न मिलने से उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरों का वेतन बढ़ाने को लेकर चल रहा आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है. पिछले एक सप्ताह से शांतिपूर्ण ढंग से जारी यह प्रदर्शन सोमवार को हिंसक हो गया, जब बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले तक छोड़ने पड़े, लेकिन हालात पूरी तरह काबू में नहीं आ सके.

वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विरोध 

नोएडा के फेज-2 स्थित औद्योगिक क्षेत्र, खासकर होजरी कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले कर्मचारियों ने सुबह काम शुरू होते ही हड़ताल का ऐलान कर दिया. मजदूरों ने फैक्ट्रियों में काम बंद कर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विरोध तेज कर दिया. देखते ही देखते यह आंदोलन कई कंपनियों में फैल गया और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं.

इस पूरे विवाद के पीछे हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में न्यूनतम मजदूरी में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है. हरियाणा में वेतन बढ़ने के बाद नोएडा के श्रमिक भी समान वेतन की मांग करने लगे हैं. उनका कहना है कि जब एक ही कंपनी हरियाणा में अधिक वेतन दे सकती है, तो नोएडा में कम भुगतान क्यों किया जा रहा है.

रिचा ग्लोबल कंपनी इस विवाद के केंद्र में बताई जा रही है. कंपनी की फरीदाबाद यूनिट में वेतन बढ़ाने के बाद नोएडा की यूनिट के कर्मचारियों ने भी समान वेतन की मांग शुरू कर दी. श्रमिकों का आरोप है कि प्रबंधन उनके साथ भेदभाव कर रहा है. जब उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो विरोध प्रदर्शन तेज हो गया.

कुछ स्थानों पर पथराव

सोमवार को हालात तब बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने कुछ स्थानों पर पथराव किया और वाहनों में आग लगा दी. मदरसन कंपनी के बाहर स्थिति विशेष रूप से तनावपूर्ण रही, जहां यातायात भी बाधित हो गया. इस घटना से प्रशासन और उद्योग जगत दोनों में चिंता बढ़ गई है.

मजदूरों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये प्रतिमाह करना, समय पर बोनस देना, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान और नौकरी की सुरक्षा शामिल है. इसके अलावा वे साप्ताहिक अवकाश और रविवार को काम कराने पर अतिरिक्त भुगतान की भी मांग कर रहे हैं.

प्रशासन ने श्रमिकों और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत कराने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है. अधिकारियों का कहना है कि कुछ मांगों पर सहमति बन गई है, जबकि मजदूरों का दावा है कि वेतन वृद्धि को लेकर उन्हें स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। यही कारण है कि आंदोलन थमने के बजाय लगातार तेज होता जा रहा है.

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