लापता MBA छात्रा का CCTV वीडियो आया सामने, गायब होने से कुछ घंटे पहले दोस्तों संग दिखी बबीता पांडे
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक पर लापता हुई 24 वर्षीय MBA छात्रा बबीता पांडे का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है. छात्रा के गायब होने के कई दिन बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला है, जबकि सेना, ITBP, SDRF और पुलिस की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं.

देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में दयारा बुग्याल ट्रेकिंग के दौरान लापता हुई 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे का एक सीसीटीवी वीडियो सामने आया है. वीडियो में वह अपने दो दोस्तों के साथ ट्रेक पर रवाना होने से पहले दिखाई दे रही हैं. बबीता 29 मई की शाम से लापता हैं और उनकी तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
लापता होने के बाद सामने आए इस फुटेज ने मामले को नई दिशा दी है. पुलिस, सेना और अन्य एजेंसियां लगातार छात्रा की तलाश में जुटी हैं, जबकि ट्रेकिंग से जुड़े दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है.
CCTV में दोस्तों के साथ नजर आईं बबीता
सामने आए सीसीटीवी फुटेज में बबीता पांडे एक काली एसयूवी के पीछे खड़ी दिखाई दे रही हैं. वाहन का ट्रंक खुला हुआ है और उनके साथ मौजूद दोस्त हरमनपाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह भी वहीं खड़े नजर आते हैं.
वीडियो में एक व्यक्ति को वाहन के ट्रंक से सामान निकालते हुए भी देखा जा सकता है. बताया जा रहा है कि यह फुटेज 29 मई का है और रायथल गांव स्थित उस होमस्टे का है, जहां तीनों ट्रेक शुरू करने से पहले ठहरे थे.
आखिरी बार बबीता रैथल गांव में नजर आई थीं। जिसके बाद वह लापता हो गई। https://t.co/HGYKYTwBHi pic.twitter.com/XeFf2Ebdp9
— bhUpi Panwar (@askbhupi) June 2, 2026
देहरादून से शुरू हुआ था सफर
नैनीताल की रहने वाली एमबीए छात्रा बबीता पांडे अपने साथियों हरमनपाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह के साथ उत्तरकाशी ट्रिप पर गई थीं.
हरमनपाल उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले का निवासी है, जबकि हरमनप्रीत उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से है. तीनों ने सबसे पहले 25 मई को देहरादून पहुंचकर वहां एक दिन बिताया था.
इसके बाद उन्होंने हरसिल, गंगोत्री और आसपास के पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया.
रायथल गांव से दयारा बुग्याल की ओर बढ़े
28 मई को तीनों रायथल गांव पहुंचे और वहां रात बिताई. अगले दिन उन्होंने दयारा बुग्याल ट्रेक शुरू किया और गोई बेस कैंप में रुकने का निर्णय लिया.
बताया गया है कि 29 मई की रात गोई बेस कैंप में ठहरने के दौरान आधी रात के आसपास बबीता पांडे अचानक लापता हो गईं.
गुमशुदगी की शिकायत के बाद शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
बबीता के परिवार की ओर से गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने व्यापक स्तर पर खोज अभियान शुरू किया.
मामले में हरमनपाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
150 सदस्यीय टीम कर रही तलाश
छात्रा की तलाश के लिए सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के लगभग 150 कर्मियों की टीम अभियान में जुटी हुई है.
तलाशी अभियान के दौरान घने जंगलों, ट्रेकिंग मार्गों और आसपास की गुफाओं में करीब पांच किलोमीटर के दायरे में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
ड्रोन, डॉग स्क्वॉड और गोताखोरों की मदद
बबीता की तलाश के लिए खोजी कुत्तों और ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
इसके अलावा गोई कैंप साइट के पास स्थित एक झील में छह सदस्यीय गोताखोरों की टीम भी खोजबीन कर रही है.
पुलिस ने छात्रा की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए लोगों से जानकारी देने की अपील की है.
ट्रेकिंग एजेंसी का पंजीकरण निलंबित
मामले की जांच के दौरान ट्रेकिंग एजेंसी 'प्रो माउंटेन' पर भी कार्रवाई की गई है. एजेंसी का पंजीकरण फिलहाल निलंबित कर दिया गया है.
जांच में सामने आया है कि बबीता पांडे और उनके साथियों को कथित तौर पर फर्जी परमिट के आधार पर दयारा बुग्याल ट्रेक पर भेजा गया था.
फर्जी परमिट इस्तेमाल करने का आरोप
उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी के अनुसार जांच में पता चला कि बबीता या उनके साथियों के नाम पर आधिकारिक पर्यटन पोर्टल "एक्सप्लोर उत्तरकाशी" से कोई वैध डिजिटल परमिट जारी नहीं किया गया था.
जांच में यह भी सामने आया कि ट्रेकिंग एजेंसी ने एक्सपायर्ड परमिट पर तीनों के नाम चिपकाकर उन्हें ट्रेक पर भेज दिया था. यह कदम सरकारी राजस्व नियमों और प्रतिदिन 150 ट्रैकर्स की निर्धारित सीमा के भी खिलाफ था.
QR कोड स्कैनिंग में खुला मामला
अधिकारियों के मुताबिक चेकपोस्ट पर जब परमिट के क्यूआर कोड को स्कैन किया गया तो उसमें पुराने ट्रैकर्स का डेटा मिला.
केके जोशी ने बताया कि इस कथित जालसाजी के कारण बचाव दल को ट्रैकर्स और संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी की पहचान करने में देरी का सामना करना पड़ा.


