देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की पहली समर्पित महिला नीति को मंजूरी दे दी है. इस नीति का उद्देश्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार, कारोबार, नेतृत्व और स्थानीय शासन में मजबूत भागीदारी दिलाना है. सरकार का मानना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है.
नई महिला नीति के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर 'महिला सभाओं' का गठन किया जाएगा. इन सभाओं के माध्यम से महिलाएं गांव के विकास, बजट, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में अपनी राय सीधे रख सकेंगी. इससे स्थानीय प्रशासन में महिलाओं की आवाज पहले से ज्यादा प्रभावी होगी और उनकी जरूरतों को योजनाओं में प्राथमिकता मिलेगी.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पहले ही महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले ले चुकी है. सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में बेटियों को रोजगार के अवसर मिले हैं.
इसके अलावा सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और सहकारी संस्थाओं के संचालन में महिलाओं की भूमिका और मजबूत होगी.
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. महिला सारथी योजना के तहत महिलाएं ऑटो-रिक्शा और टू-व्हीलर टैक्सी चलाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं.
वहीं ड्रोन दीदी योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक खेती के लिए ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके अलावा लखपति दीदी योजना, एकल महिला स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर दे रही हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि महिलाएं उत्तराखंड समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं. सरकार का लक्ष्य उन्हें हर क्षेत्र में बराबर अवसर देना है ताकि वे राज्य के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें. नई महिला नीति इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है.
उत्तराखंड की यह पहल देश के लिए एक नया मॉडल बन सकती है, जहां महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं बल्कि विकास की प्रमुख भागीदार बनकर सामने आएंगी. First Updated : Monday, 29 June 2026