नाबालिगों के बीच सहमति से बने संबंध तो...क्या है रोमियो-जूलियट कानून, जिसे पॉक्सो में लाने के लिए SC ने केंद्र को दिए निर्देश ?

पॉक्सो एक्ट के गलत इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि पॉक्सो कानून में रोमियो-जूलियट धारा जोड़ा जाए. ताकि नाबालिगों को प्यार करने पर कठघरे में खड़ा न किया जाए. यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश से जुड़े एक मामले में दिया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में पॉक्सो अधिनियम के गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है. अदालत का कहना है कि इस सख्त कानून का उपयोग कई बार ऐसे मामलों में हो रहा है, जहां नाबालिग किशोर आपसी सहमति से संबंध में होते हैं, लेकिन बाद में पारिवारिक या सामाजिक दबाव के चलते इसे आपराधिक मामला बना दिया जाता है.

कानून में बदलाव पर विचार का सुझाव

आपको बता दें कि जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह पॉक्सो अधिनियम में ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ जोड़ने की संभावना पर विचार करे. अदालत के अनुसार, इस तरह के प्रावधान से उन किशोरों को राहत मिल सकेगी, जो अपरिपक्वता में सहमति से संबंध बनाते हैं और जिनके मामलों में अपराध की मंशा नहीं होती.

गलत इस्तेमाल रोकने के लिए सख्त व्यवस्था की जरूरत
पीठ ने कहा कि पॉक्सो जैसे कड़े कानून का व्यापक स्तर पर दुरुपयोग न्यायिक प्रणाली के लिए चिंता का विषय है. कोर्ट ने केंद्र से अपेक्षा जताई कि वह ऐसे उपाय विकसित करे, जिनसे वास्तविक अपराध और सहमति से बने किशोर संबंधों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके. इसके साथ ही, ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जो निजी बदले के लिए इस कानून का इस्तेमाल करते हैं.

उत्तर प्रदेश से जुड़ा मामला बना आधार
यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी. हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से जुड़े एक यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को जमानत दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाईकोर्ट का फैसला कानूनी रूप से सही नहीं था, लेकिन आरोपी को दी गई जमानत को रद्द नहीं किया गया.

विधि सचिव को भेजी जाएगी आदेश की प्रति
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो कानून के दुरुपयोग को लेकर पहले भी अदालतें चिंता जता चुकी हैं. इसी कारण इस फैसले की एक प्रति भारत सरकार के विधि सचिव को भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि वे इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदमों पर विचार कर सकें.

रोमियो-जूलियट क्लॉज का उद्देश्य क्या है
रोमियो-जूलियट क्लॉज का मकसद ऐसे वास्तविक किशोर संबंधों को पॉक्सो की कठोर धाराओं से बाहर रखना है, जहां दोनों पक्ष नाबालिग हों और संबंध आपसी सहमति से बने हों. वर्तमान कानून में सहमति को मान्यता नहीं दी गई है, जिसके चलते कई मामलों में किशोरों को गंभीर अपराधी मान लिया जाता है. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि कानून में संतुलन लाना जरूरी है, ताकि निर्दोष किशोरों को अनावश्यक सजा से बचाया जा सके और वास्तविक अपराधियों पर सख्ती बनी रहे.

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