अजित पवार के निधन के बाद क्या शिंदे बढ़ाएंगे देवेंद्र फडणवीस का सिरदर्द? जानें महायुति के सामने क्या है बड़ी चुनौती

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान हादसे में निधन से राज्य की राजनीति में शोक और अस्थिरता है. देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें करीबी मित्र बताया. उनके जाने से महायुति का संतुलन बिगड़ सकता है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

मुंबईः महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान दुर्घटना में अचानक हुए निधन ने राज्य की राजनीति को गहरे शोक और अनिश्चितता में डाल दिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस दुखद घटना पर भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने न केवल एक मजबूत राजनीतिक सहयोगी, बल्कि एक उदार और भरोसेमंद मित्र को खो दिया है. पवार और फडणवीस के रिश्ते केवल सत्ता तक सीमित नहीं थे, बल्कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद आपसी समझ और सम्मान पर आधारित थे.

फडणवीस–पवार की अनोखी राजनीतिक केमिस्ट्री

अजीत पवार एक ऐसे नेता थे जो कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना और भाजपा हर धड़े के साथ काम करने की क्षमता रखते थे. देवेंद्र फडणवीस के साथ उनका रिश्ता इसका बड़ा उदाहरण रहा. 2019 में 72 घंटे की सरकार के दौरान भले ही राजनीतिक उठा-पटक हुई, लेकिन दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत कटुता कभी सामने नहीं आई.

फडणवीस ने बाद में माना भी कि वह प्रयोग राजनीतिक रूप से असफल रहा, लेकिन उन्हें उस फैसले पर कोई पछतावा नहीं था. उस दौर के बाद भी पवार और फडणवीस के बीच संवाद और विश्वास बना रहा.

2023 में फिर साथ आई राजनीति

2023 में महाराष्ट्र की राजनीति ने एक बड़ा मोड़ लिया, जब अजीत पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर एनसीपी में विभाजन कर दिया और शिंदे-फडणवीस सरकार का हिस्सा बने. इस कदम ने महायुति गठबंधन को मजबूती दी. पवार सरकार में ऐसे नेता के रूप में उभरे, जो न केवल प्रशासनिक अनुभव रखते थे, बल्कि गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते थे.

2024 चुनाव के चुनावी नतीजे

2024 के विधानसभा चुनावों के बाद महायुति को स्पष्ट जनादेश मिला, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई. एकनाथ शिंदे की कड़ी सौदेबाजी से सरकार गठन में देरी हुई. ऐसे समय में अजीत पवार ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा कर स्थिति को संभाल लिया.

एक चर्चित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, जब शिंदे फैसले को टालते दिखे, तब पवार ने साफ शब्दों में कहा कि वह इंतजार नहीं करेंगे और शपथ लेंगे. अंततः शिंदे को पीछे हटना पड़ा और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने.

सरकार में पवार की अहम भूमिका

पिछले एक साल में अजीत पवार ने कृषि, जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे अहम विभागों में नीतिगत फैसलों को दिशा दी. पश्चिमी महाराष्ट्र की सहकारी राजनीति में उनकी पकड़ सरकार के लिए संजीवनी साबित हुई. वे ऐसे नेता थे जो शिंदे की बढ़ती राजनीतिक आक्रामकता को संतुलित कर सकते थे.

अब महायुति के सामने नई चुनौती

अजीत पवार के निधन के बाद महायुति गठबंधन की सबसे बड़ी ढाल कमजोर हो गई है. एनसीपी में उनके कद का कोई दूसरा नेता न होने से एकनाथ शिंदे की स्थिति और मजबूत हो सकती है. हाल के बीएमसी और नगर निगम चुनावों में मेयर पद को लेकर बनी अनिश्चितता इसका संकेत है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब देवेंद्र फडणवीस को बिना अजीत पवार के नए सियासी संतुलन के साथ आगे बढ़ना होगा. महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक नई वास्तविकता है, एक ऐसा महायुति गठबंधन, जिसमें अजीत पवार नहीं हैं.

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