बिना डिग्री के महाराष्ट्र के सशक्त नेता कैसे बने अजित पवार? जानिए एकेडमिक सफर

विमान हादसे में निधन के बाद अजित पवार की जीवन यात्रा पर नजर डालें तो यह साफ होता है कि उन्होंने सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया. उनकी कहानी बताती है कि अनुभव, जमीनी समझ और नेतृत्व क्षमता, डिग्रियों से कहीं ज्यादा मायने रखती है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

महाराष्ट्र की राजनीति में एक सशक्त और प्रभावशाली नेता के रूप में पहचाने जाने वाले अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे. एक विमान दुर्घटना में उनका असामयिक निधन हो गया. उनके जाने से राजनीति में ही नहीं, बल्कि जनमानस में भी एक गहरा खालीपन पैदा हुआ है. अजित पवार अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जो यह बताती है कि नेतृत्व की पहचान केवल शैक्षणिक डिग्रियों से नहीं, बल्कि अनुभव, जमीनी समझ और निर्णय लेने की क्षमता से बनती है.

राजनीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा अजित पवार का जीवन 

बारामती से उभरे अजित पवार का जीवन शुरू से ही राजनीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा. छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव सार्वजनिक गतिविधियों की ओर हो गया था. परिवार का राजनीतिक वातावरण और ग्रामीण मुद्दों से गहरा लगाव उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा रहा. पढ़ाई के साथ-साथ समाज को करीब से समझने का जो अनुभव उन्हें मिला, वही आगे चलकर उनकी राजनीति की नींव बना.

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ था. वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार के भतीजे थे. हालांकि राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. समर्थकों के बीच वे स्नेह से ‘दादा’ कहे जाते थे. ग्रामीण महाराष्ट्र से उनका गहरा रिश्ता उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जाता रहा.

शिक्षा को लेकर रहे ईमानदार

अपनी शिक्षा को लेकर अजित पवार हमेशा खुले और ईमानदार रहे. उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि वे दसवीं कक्षा में एक विषय में असफल हो गए थे. हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अगले वर्ष परीक्षा दोबारा देकर सफलता हासिल की. वे खुद को कभी असाधारण छात्र नहीं मानते थे, लेकिन असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ना उनकी खासियत थी.

इसके बाद उन्होंने बी.कॉम की पढ़ाई शुरू की, लेकिन यह डिग्री पूरी नहीं कर सके. उनका एक सेमेस्टर शेष रह गया था और नियमों के चलते वे आगे परीक्षा नहीं दे पाए. इसी कारण वे स्वयं को हमेशा बारहवीं पास ही बताते रहे. उन्होंने कभी अपनी अधूरी शिक्षा को छिपाने की कोशिश नहीं की, बल्कि इसे सहज रूप से स्वीकार किया.

सामाजिक और जनसेवा से जुड़े रहे अजित पवार 

कॉलेज के दिनों से ही अजित पवार सामाजिक और जनसेवा से जुड़े रहे. स्थानीय समस्याओं को समझना, लोगों से संवाद करना और उनके हितों के लिए आवाज उठाना उनके स्वभाव में शामिल था. यही अनुभव उन्हें सक्रिय राजनीति तक ले गया और जनता के साथ उनका सीधा और मजबूत रिश्ता बना.

अजित पवार की जीवन यात्रा इस बात का उदाहरण है कि सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद भी व्यक्ति ऊंचे मुकाम तक पहुंच सकता है. प्रशासनिक समझ, राजनीतिक सूझबूझ और अथक मेहनत के बल पर उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में अहम स्थान हासिल किया और एक प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई.

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