कांग्रेस का दामन थामेंगे प्रशांत किशोर! प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के एक महीने बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी से मुलाकात की है. अपडेट जारी है...

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के करीब एक महीने बाद जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. इस बार वजह उनकी कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई कथित मुलाकात है. इस खबर के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं, हालांकि दोनों पक्षों की ओर से इसे औपचारिक रूप से अहम नहीं बताया गया है.

सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात पिछले सप्ताह नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ में हुई, जहां करीब एक घंटे तक दोनों नेताओं के बीच बातचीत चली. बताया जा रहा है कि यह मुलाकात सोनिया गांधी के आवास पर हुई, जिससे इसके राजनीतिक महत्व को और बल मिलता है. हालांकि इस संबंध में न तो कांग्रेस और न ही जन सुराज पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.

प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया ने बढ़ाई जिज्ञासा
संसद परिसर में जब प्रियंका गांधी से इस मुलाकात को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसे हल्के अंदाज में टालते हुए कहा कि क्या यह कोई बड़ी खबर है. उनकी इस प्रतिक्रिया ने जहां एक ओर अटकलों को शांत करने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर सियासी जिज्ञासा को और बढ़ा दिया.

कांग्रेस से पुराने रिश्तों का रहा है इतिहास
प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच संबंध नए नहीं हैं. नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से अलग होने के बाद वे वर्ष 2021 में कांग्रेस से जुड़े थे. 2022 में उन्होंने पार्टी के संगठन को मजबूत करने और 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए एक विस्तृत रणनीतिक खाका भी तैयार किया था. हालांकि, संगठन में भूमिका और अधिकार को लेकर मतभेद बढ़ने के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए.

कड़वाहट के साथ टूटा था रिश्ता
कांग्रेस से अलग होते समय प्रशांत किशोर ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी. इसके बाद वे पार्टी की नीतियों और नेतृत्व के आलोचक के रूप में सामने आए. बिहार चुनाव के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस के चुनावी मुद्दों और अभियानों पर सवाल खड़े किए थे और उन्हें जमीनी हकीकत से दूर बताया था.

बिहार चुनाव में जन सुराज की करारी हार
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव को त्रिकोणीय बनाने का दावा किया था, लेकिन नतीजे इसके उलट रहे. पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली और उसके लगभग सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. यह हार न केवल चुनावी रणनीति बल्कि पार्टी की जमीनी पकड़ पर भी सवाल खड़े करती है.

कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन भी बना कारण
दूसरी ओर, कांग्रेस का प्रदर्शन भी अपेक्षा से काफी कमजोर रहा. पार्टी ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन केवल छह सीटों पर जीत दर्ज कर सकी. यह नतीजा 2020 के विधानसभा चुनाव में मिले प्रदर्शन से भी खराब रहा. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बदले हालात में दोनों पक्ष एक-दूसरे के विकल्प तलाश रहे हैं.

नई राजनीतिक संभावनाओं की अटकलें
हालांकि प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच किसी नई राजनीतिक साझेदारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों के कमजोर चुनावी प्रदर्शन के बाद इस मुलाकात को संभावित नए समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है. सियासी हलकों में चर्चा है कि पर्दे के पीछे कोई नई रणनीति आकार ले रही है, हालांकि इसकी दिशा और स्वरूप को लेकर फिलहाल केवल कयास ही लगाए जा सकते हैं.

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