लोकसभा में महिला आरक्षण पर बड़ा संग्राम, पीएम मोदी का विपक्ष पर हमला, 33 प्रतिशत बिल से बदल सकती है पूरी राजनीति

महिला आरक्षण बिल संसद में पेश हुआ। पीएम मोदी ने विपक्ष को घेरा। सदन में बहस तेज हो गई। आने वाले समय में राजनीति की दिशा बदल सकती है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक माहौल बना हुआ है। सरकार ने 33 प्रतिशत आरक्षण वाला विधेयक पेश किया है। इस पर चर्चा की शुरुआत खुद प्रधानमंत्री ने की। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को अब निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है। यह सिर्फ एक कानून नहीं है। इसे देश के भविष्य से जोड़ा जा रहा है।

पीएम मोदी ने विपक्ष पर क्या कहा?

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कुछ दल अपने पद खोने के डर से आरक्षण का समर्थन नहीं कर रहे हैं। यह बयान सदन में गूंज गया। उन्होंने यह भी कहा कि निजी बातचीत में सभी इस बात को मानते हैं। लेकिन सार्वजनिक तौर पर विरोध किया जाता है। यह दोहरी राजनीति नहीं चल सकती।

क्या बदलेगी देश की राजनीति?

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ सड़क और रेल नहीं है। असली विकास तब होगा जब महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बिल देश की राजनीति की दिशा बदल सकता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो फैसले भी बदलेंगे। यह कदम लंबे समय से लंबित था। अब इसे टाला नहीं जा सकता।

क्या NDA के पास पूरा आंकड़ा है?

इस विधेयक को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी है। मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास पूरा आंकड़ा नहीं है। ऐसे में सरकार को विपक्ष का समर्थन चाहिए। यही वजह है कि यह बिल सियासी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में संख्या का खेल अहम रहेगा।

क्या बढ़ सकती हैं लोकसभा सीटें?

इस बिल के साथ एक और बड़ा प्रस्ताव जुड़ा है। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई है। मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे देश की चुनावी तस्वीर बदल सकती है।

क्या होगा परिसीमन आयोग का रोल?

सरकार परिसीमन आयोग बनाने की तैयारी में है। यह आयोग नई सीटों का बंटवारा करेगा। राज्यों की जनसंख्या के हिसाब से सीटें तय होंगी। इससे कई राज्यों का राजनीतिक संतुलन बदल सकता है। यह प्रक्रिया लंबी और संवेदनशील मानी जाती है।

यह बिल पास होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि बहस अब तेज रहेगी। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है। विपक्ष सवाल उठा रहा है। देश की राजनीति में यह मुद्दा बड़ा मोड़ ला सकता है।

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