'फील्ड मार्शल नहीं, राजा बन जाओ', इमरान का असीम मुनीर पर तंज

पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने पर पूर्व पीएम इमरान खान ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें फील्ड मार्शल नहीं, खुद को 'राजा' घोषित कर देना चाहिए था, क्योंकि देश में इस वक्त जंगल का कानून चल रहा है और जंगल में सिर्फ एक राजा होता है.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

पाकिस्तान में एक नई राजनीतिक और सैन्य बहस ने जन्म ले लिया है, जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पदोन्नति पर तीखा कटाक्ष किया. गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में इमरान खान ने कहा कि जनरल मुनीर को फील्ड मार्शल नहीं, बल्कि "राजा" की उपाधि मिलनी चाहिए थी, क्योंकि इस समय पाकिस्तान में "जंगल का कानून" चल रहा है.

जनरल असीम मुनीर को हाल ही में पाकिस्तान का पहला फील्ड मार्शल नियुक्त किया गया, जो सैन्य इतिहास में एक असाधारण कदम माना जा रहा है. इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है. इमरान खान ने तंज कसते हुए कहा, "माशाअल्लाह! जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बना दिया गया है. लेकिन चूंकि देश में जंगल राज है, इसलिए उन्हें खुद को 'राजा' घोषित कर लेना चाहिए था. जंगल में तो एक ही राजा होता है."

जेल से उठी आवाज़: कोई सौदा नहीं, कोई बातचीत नहीं

2023 से जेल में बंद इमरान खान ने अपनी पोस्ट में उन अफवाहों को भी सिरे से खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उनकी सेना के साथ कोई सौदा या सुलह हो रही है. उन्होंने कहा, "मेरे और किसी भी शक्ति के बीच न कोई सौदा हुआ है, न कोई बातचीत चल रही है. ये केवल झूठे और बेबुनियाद दावे हैं, जिनका मकसद मेरी छवि को नुकसान पहुंचाना है."

पाकिस्तान की हालत पर चिंता

इमरान खान ने पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश इस समय बाहरी खतरों, आतंकी हमलों और भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहा है. उन्होंने चेताया कि सरकार को भारत की ओर से संभावित हमले के लिए तैयार रहना चाहिए. “आज हमारा देश कई मोर्चों पर खतरे में है. हमें राजनीतिक झगड़ों से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा. मैंने कभी अपने लिए कुछ नहीं मांगा, और आज भी मैं केवल पाकिस्तान के हित की बात करता हूं,” खान ने कहा.

सरकार पर भी निशाना

इमरान खान ने शहबाज शरीफ सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि आज के हालात ऐसे हैं, जहां लोकतंत्र, न्याय और नागरिक अधिकार खत्म होते जा रहे हैं. उन्होंने जनरल मुनीर की भूमिका को ‘राजा’ जैसी बताते हुए इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया.

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