नेपाल में Gen-Z के प्रोटेस्ट के बीच काठमांडू एयरपोर्ट पर लगा हेलीकॉप्टर पर लगा तांता, ओली समेत देश छोड़ने की फिराक में कई नेता
नेपाल में Gen-Z प्रदर्शनों के दूसरे दिन हिंसा चरम पर पहुंच गई, काठमांडू सहित कई शहरों में आगजनी और हमले हुए. त्रिभुवन एयरपोर्ट पर नेताओं को बचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की कतार लगी. संसद भवन, कांग्रेस मुख्यालय और नेताओं के घरों पर हमले हुए. अब तक 22 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों घायल, हालात गंभीर बने हैं.

Nepal protest: नेपाल में जारी Gen-Z प्रदर्शनों का दूसरा दिन और भी उग्र हो गया. राजधानी काठमांडू सहित कई शहर हिंसा की चपेट में हैं. प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि सरकारी इमारतों और नेताओं के घरों को निशाना बनाया गया.
त्रिभुवन एयरपोर्ट पर हेलीकॉप्टरों की कतार
बागमती स्थित त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (TIA) पर मंगलवार को असामान्य हलचल देखने को मिली. सूत्रों के अनुसार, सेना ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, उनके कैबिनेट सहयोगियों और कई अन्य नेताओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नेताओं को भागने का रास्ता दिया जा रहा है. इसी गुस्से में उन्होंने सिमरिक एयरलाइंस के दफ्तर में आग लगा दी.
मंत्रियों को बचाने के लिए सेना की तैनाती
सरकार के मंत्रियों के लिए भैसेपाटी स्थित आवासों से दर्जनभर हेलीकॉप्टर रवाना हुए. एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए नेपाल सेना ने अतिरिक्त जवान तैनात कर दिए हैं. हालांकि विपक्ष का कहना है कि मौजूदा हालात से निकलने का एकमात्र रास्ता नया प्रधानमंत्री चुनने की प्रक्रिया शुरू करना है.
Choppers on standby at Kathmandu airport in Nepal to give safe passage outside the country to corrupt politicians of the country. Which country would they fly? pic.twitter.com/p2bCDMCuru
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) September 9, 2025
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर
बढ़ती हिंसा के चलते नेपाल के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं बाधित हो गई हैं. भारतीय एयरलाइंस एयर इंडिया और इंडिगो ने दिल्ली-काठमांडू के बीच की उड़ानें रद्द करने का फैसला किया है. अन्य विदेशी एयरलाइंस भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं.
ओली के इस्तीफे के बाद भी जारी गुस्सा
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के पद से इस्तीफे के बाद उम्मीद थी कि स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को संसद भवन में आगजनी की. इसके अलावा नेपाली कांग्रेस मुख्यालय, राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल, पूर्व प्रधानमंत्रियों पुष्पकमल दाहाल प्रचंड और शेर बहादुर देउबा के घरों पर भी हमले किए गए. यहां तक कि काठमांडू स्थित हिल्टन होटल, जो सत्ताधारी दल के एक नेता का बताया जाता है, को भी जला दिया गया.
पुलिस-सेना की कार्रवाई
हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस और सेना ने आंसू गैस, रबर बुलेट्स और वॉटर कैनन का सहारा लिया. इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया. जगह-जगह टकराव की घटनाएं सामने आईं.
मौतें और घायलों की संख्या बढ़ी
8 सितंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक 22 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों लोग घायल हैं, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. राष्ट्रपति पौडेल ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया, लेकिन यह कदम गुस्से को शांत करने में नाकाफी साबित हुआ.
एयरपोर्ट पर लगी हेलीकॉप्टरों की कतार
त्रिभुवन एयरपोर्ट पर लगी हेलीकॉप्टरों की लंबी कतार और नेताओं को सुरक्षित निकालने की कवायद इस बात का प्रतीक है कि नेपाल का राजनीतिक संकट और गहराता जा रहा है. जनता जहां सड़कों पर है, वहीं सत्ताधारी वर्ग सुरक्षा की तलाश में भागने को मजबूर दिख रहा है. यह हालात नेपाल के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.


