कुवैत में नियम हुए सख्त, हजारों लोगों की नागरिकता रद्द, नए कानून से बढ़ी चिंता
कुवैत ने 1959 के नागरिकता कानून में सख्त संशोधन लागू करते हुए नागरिकता पाने और बनाए रखने के नियम कड़े कर दिए हैं, जिसके बाद हजारों लोगों की नागरिकता रद्द की जा चुकी है.

नई दिल्ली: कुवैत सरकार ने नागरिकता से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 1959 के नागरिकता कानून में संशोधन लागू कर दिए हैं. इन बदलावों के बाद देश में हजारों लोगों की नागरिकता रद्द की जा चुकी है. सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों का उद्देश्य नागरिकता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है.
पहले की तुलना में नियम कड़े
सरकारी राजपत्र अल-कुवैत अल-यौम में प्रकाशित अमीरी डिक्री संख्या 15 के तहत नागरिकता प्राप्त करने की शर्तों को पहले की तुलना में काफी कड़ा कर दिया गया है. नए नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति कुवैत की नागरिकता हासिल करेगा, उसे तीन महीने के भीतर अपनी किसी अन्य देश की नागरिकता छोड़नी होगी. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन संशोधनों के लागू होने के बाद अब तक 2,182 लोगों की नागरिकता समाप्त की जा चुकी है.
सरकार ने नागरिकता रद्द करने के आधारों का भी विस्तार किया है. यदि कोई व्यक्ति नागरिकता आवेदन के दौरान गलत जानकारी देता है, दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करता है या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में दोषी पाया जाता है तो उसकी नागरिकता वापस ली जा सकती है. इसके अलावा, ऐसी गतिविधियां भी कार्रवाई का कारण बन सकती हैं जिन्हें सरकार सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदेह मानती है.
संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेंगे नियम
नए नियमों का असर केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा. जिन लोगों की नागरिकता समाप्त की गई है, उनके परिवार के सदस्य भी प्रभावित हो सकते हैं और उनका कुवैती पासपोर्ट भी रद्द किया जा सकता है. हालांकि, सरकार ने प्रभावित लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील करने का अवसर दिया है.
संशोधित कानून में प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त करने वालों के बच्चों की स्थिति भी बदली गई है. अब ऐसे बच्चों को जन्मजात कुवैती नागरिक नहीं माना जाएगा, बल्कि उन्हें प्राकृतिक नागरिक की श्रेणी में रखा जाएगा. वयस्क होने पर वे अपनी नागरिकता को लेकर निर्णय ले सकेंगे.
यह कार्रवाई 2024 में शुरू किए गए व्यापक नागरिकता सुधार अभियान का हिस्सा मानी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक करीब 70 हजार लोगों के खिलाफ नागरिकता संबंधी कार्रवाई की जा चुकी है.
कुवैत में नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं, बेरोजगारी सहायता, आवासीय सुविधाओं पर सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभ मिलते हैं. ऐसे में नागरिकता समाप्त होने का प्रभाव केवल कानूनी पहचान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर भी पड़ता है. इसी बीच, प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री शेख फहद अल-यूसुफ ने नागरिकता से जुड़े कथित फर्जीवाड़ों और नियमों के उल्लंघन में कुछ सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता पर भी चिंता जताई है.


