मेरे नुकसान के लिए PAK सरकार जिम्मेदार...पाकिस्तान में हिंदू कार्यकर्ता के खिलाफ फतवा जारी, TLP ने दी जान से मारने की धमकी
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता शिवा कच्छी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए अपील की है. उन्होंने वीडियो में बताया है कि नाबालिग हिंदू लड़की को जबरन अपहरण और धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उन्हें तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान(TLP) की ओर से फतवा जारी कर हत्या की धमकी दी गई है.

नई दिल्ली : पाकिस्तान के सिंध प्रांत से हिंदू अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है. हिंदू अधिकार कार्यकर्ता शिवा कच्छी ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया है कि नाबालिग हिंदू लड़कियों के जबरन अपहरण और धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. उनका कहना है कि धार्मिक कट्टरपंथी गुटों की ओर से उन्हें खुली धमकियां दी जा रही हैं.
आपको बता दें कि शिवा कच्छी ने आरोप लगाया है कि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से जुड़े सरहिंदी गुट के कुछ मौलवियों ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया है और उनकी हत्या की धमकी दी है. उनके अनुसार, उन्हें ‘इस्लाम विरोधी’ और ‘राज्य विरोधी’ बताकर हिंसा के लिए उकसाया जा रहा है. कच्छी का कहना है कि यह सब केवल इसलिए हो रहा है क्योंकि वे धार्मिक चरमपंथ और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अन्याय के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं.
“My life is in danger. Those involved in forcibly converting Hindu girls — the Sarhindi group — are falsely accusing me of being anti-Islam and anti-state. They want to have me killed just like Dr. Shahnawaz Kumbhar.
“They (the Pir Sarhindi group) are once again trying to repeat… pic.twitter.com/xfYzgocJlq
— Shiva Kachhi (دراوڙ)🇵🇰 (@FaqirShiva) December 2, 2025
सरकार और पुलिस पर चुप्पी साधने का आरोप
शिवा कच्छी ने संघीय सरकार, सिंध प्रांतीय सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि तमाम धमकियों और जोखिम के बावजूद प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है. उन्होंने इसे राज्य की विफलता ही नहीं, बल्कि आपराधिक मिलीभगत करार दिया है. कच्छी के मुताबिक, जब चरमपंथी खुलेआम धमकी दे सकते हैं और सरकार आंखें मूंद लेती है, तो देश में कोई भी सुरक्षित नहीं रह जाता.
सोशल मीडिया के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार
शिवा कच्छी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, अमेरिकी सरकार, ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई वैश्विक संगठनों को टैग करते हुए लिखा कि अगर उन्हें या उनके परिवार को कोई नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार की होगी. उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र ‘अपराध’ अन्याय, जबरन धर्मांतरण और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ बोलना है.
दरवार इत्तेहाद के जरिए अल्पसंख्यकों की मदद
शिवा कच्छी अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ‘दरवार इत्तेहाद’ के अध्यक्ष और संस्थापक हैं. वे लंबे समय से सिंध में हिंदू समुदाय के मुद्दों को उठाते रहे हैं. उनका दावा है कि उन्होंने दर्जनों ऐसी हिंदू लड़कियों की मदद की है, जिनका अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और बाद में उनकी मुस्लिम पुरुषों से शादी करवा दी गई. इन मामलों में उन्होंने पीड़ित लड़कियों को उनके परिवारों से मिलवाने में भी भूमिका निभाई है.
सिंध में हिंदू समुदाय की संवेदनशील स्थिति
सिंध प्रांत में पाकिस्तान के हिंदू समुदाय की सबसे बड़ी आबादी रहती है. देश की कुल हिंदू आबादी, जो लगभग 40 से 50 लाख मानी जाती है, उसका करीब 94 प्रतिशत हिस्सा इसी प्रांत में निवास करता है. वर्ष 2023 की जनगणना के अनुसार, उमरकोट पाकिस्तान का एकमात्र हिंदू-बहुसंख्यक जिला है, जहां हिंदुओं की आबादी लगभग 52 प्रतिशत है. इसके बावजूद, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सिंध में हर साल सैकड़ों नाबालिग हिंदू और ईसाई लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले सामने आते हैं, लेकिन इनमें सजा बेहद कम मामलों में होती है.
पहले भी उठा चुके हैं ऐसे मामलों को
यह पहली बार नहीं है जब शिवा कच्छी ने इस तरह की अपील की हो. दिसंबर 2025 में भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाई थी और डॉ. शाहनवाज कुम्भार की हत्या का जिक्र किया था, जिन्हें कथित रूप से ब्लासफेमी के झूठे आरोप में पुलिस हिरासत में मार दिया गया था. इसके अलावा नवंबर 2025 में एक नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और मुस्लिम से शादी का मामला भी चर्चा में रहा था.
प्रतिबंध के बावजूद सक्रिय कट्टरपंथी गुट
हालांकि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पर अक्टूबर 2025 में प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन शिवा कच्छी का आरोप है कि इसके अलग-अलग गुट आज भी सक्रिय हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक ऐसे संगठनों पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होती, तब तक पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और अधिक असुरक्षित बनी रहेगी.


