सेना के कैडर में खौफ, शी जिनपिंग ने कई सीनियर जनरलों को निपटाया...अब सेना के अफसरों की कर रहे तारीफ
शी जिनपिंग ने शीर्ष कमांडरों पर कार्रवाई के बाद जमीनी सैनिकों की वफादारी की सराहना की है. भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान ने चीनी सेना के नेतृत्व ढांचे को बदल दिया है, जिससे अब जिनपिंग का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया है.

नई दिल्ली : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष स्तर पर मचे भारी सियासी भूचाल के बाद पहली बार सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई है. वसंत उत्सव से ठीक पहले बीजिंग के दौरे पर निकले जिनपिंग ने सेना के बड़े अधिकारियों के बजाय 'जमीनी स्तर' के सैनिकों की वफादारी पर जोर दिया. पिछले कुछ वर्षों में चीनी सेना के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के नाम पर जिस तरह से पुराने और करीबी जनरलों को हटाया गया है, उसने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है.
भ्रष्टाचार के खिलाफ 'क्रांतिकारी' युद्ध
आपको बता दें कि राष्ट्रपति जिनपिंग ने पिछले वर्ष को 'असाधारण और असामान्य' बताते हुए कहा कि सेना में गहरे राजनीतिक सुधार किए गए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह जंग एक 'क्रांतिकारी बदलाव' है जो सेना को शुद्ध करने के लिए आवश्यक थी. जिनपिंग का मानना है कि इन कठोर कदमों से सेना के भीतर मौजूद जोखिमों और चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सका है. उन्होंने निचले स्तर के सैनिकों को भरोसेमंद बताते हुए उनकी ईमानदारी की जमकर प्रशंसा की.
रॉकेट फोर्स से लेकर रक्षा मंत्री तक गाज
चीनी सेना में सफाई का यह सिलसिला 2023 से ही जारी है. सबसे पहले रॉकेट फोर्स के कई बड़े कमांडरों को पद से हटाया गया. इसके बाद 2024 में रक्षा मंत्री ली शांगफू पर कार्रवाई हुई. साल 2025 भी इस मामले में पीछे नहीं रहा, जब सीएमसी के वाइस चेयरमैन हेई वेइडोंग और मियाओ हुआ को निकाल दिया गया. इन कार्रवाइयों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जिनपिंग अपनी राह में आने वाली किसी भी बाधा या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
सबसे करीबियों पर भी चली तलवार
जनवरी 2026 में चीनी सेना को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब शी जिनपिंग के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले जनरल झांग यौशिया और जॉइंट स्टाफ चीफ लिऊ झेनली जांच के घेरे में आ गए. झांग यौशिया सालों से जिनपिंग के रणनीतिक साथी थे, लेकिन भ्रष्टाचार और परमाणु रहस्यों को अमेरिका के साथ साझा करने के आरोपों ने उन्हें भी नहीं बख्शा. अब शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) केवल दो सदस्यों, जिनपिंग और झांग शेंगमिन तक सिमटकर रह गया है.
पार्टी की वफादारी सर्वोपरि
चीन में सेना सरकार की नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी की होती है. पीएलए डेली के मुताबिक, हटाए गए अधिकारियों पर आरोप था कि वे पार्टी के नेतृत्व को चुनौती दे रहे थे. जिनपिंग ने 2012 से ही इस बात पर जोर दिया है कि सेना को हमेशा नागरिक नेतृत्व और पार्टी के आदेशों का पालन करना चाहिए. पदोन्नति के लिए रिश्वत लेने जैसे मामलों ने जिनपिंग को यह मौका दिया कि वे सेना पर अपना 'पूर्ण नियंत्रण' और अधिक मजबूत कर सकें.
सीमा पर हाई अलर्ट के निर्देश
स्प्रिंग फेस्टिवल की छुट्टियों से पहले जिनपिंग ने सैनिकों को बॉर्डर सिक्योरिटी को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि छुट्टियों के दौरान भी युद्ध के लिए तैयार रहना चीनी सेना की एक शानदार परंपरा रही है. बीजिंग के अपने दो दिवसीय दौरे में उन्होंने स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की और नए साल की शुभकामनाएं दीं. जिनपिंग का यह दौरा सेना और देश को यह दिखाने की कोशिश है कि अब सत्ता पूरी तरह उनके हाथ में है.


