ईरान ने सऊदी में तबाह किया 300 मिलियन का अमेरिकी AWACS विमान, जानें क्यों था खास

ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला कर अमेरिकी E-3 Sentry AWACS विमान को नष्ट करने का दावा किया है. यह विमान हवाई निगरानी के लिए बेहद अहम था, जिससे अमेरिका को रणनीतिक झटका लगा है.

Shraddha Mishra

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक सैन्य संतुलन को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाते हुए हमला किया है. इस हमले में अमेरिका के एक अत्याधुनिक निगरानी विमान के नष्ट होने का दावा किया गया है, जिसे अमेरिकी सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

रियाद के पास स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस अमेरिकी सैन्य अभियानों का प्रमुख केंद्र है. ईरान का कहना है कि हाल ही में किए गए हमले में उसका निशाना एक E-3 Sentry विमान था, जो एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) से लैस होता है. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में इस विमान का पिछला हिस्सा जला हुआ नजर आया है. बताया जा रहा है कि हमले के वक्त यह विमान टैक्सीवे पर खड़ा था. इसकी पहचान सीरियल नंबर 81-0005 के रूप में की गई है.

अमेरिका के लिए क्यों अहम है E-3 Sentry?

E-3 Sentry विमान अमेरिका की हवाई निगरानी व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. इसकी कीमत करीब 300 मिलियन डॉलर बताई जाती है. ऐसे में इसका नष्ट होना सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बड़ा झटका है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के विमान युद्ध के दौरान आसमान में “आंख और कान” का काम करते हैं. इनके बिना दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना और तुरंत प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो सकता है.

E-3 Sentry की खास भूमिका

यह विमान एक उन्नत रडार सिस्टम से लैस होता है, जो लंबी दूरी तक हवाई खतरों का पता लगा सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका गोल घूमने वाला रडार डोम है, जो 360 डिग्री में निगरानी करता है. E-3 Sentry करीब 250 मील से अधिक दूरी तक विमानों, मिसाइलों और ड्रोन जैसी गतिविधियों को ट्रैक कर सकता है. यह सिर्फ निगरानी ही नहीं करता, बल्कि युद्ध के दौरान अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल भी बनाता है.

पहले से कम हो रही संख्या

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के पास सक्रिय E-3 विमानों की संख्या पहले ही घट रही है. इसके अलावा पुराने सिस्टम और रखरखाव से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं. ऐसे में इस हमले के बाद अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में निगरानी क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे भविष्य के सैन्य अभियानों पर असर पड़ने की आशंका है.

एयरोस्पेस विशेषज्ञों का मानना है कि E-3 जैसे विमान युद्ध प्रबंधन में बेहद अहम होते हैं. ये हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखने, टारगेट तय करने और सैन्य ऑपरेशन को प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद करते हैं. अगर ऐसे प्लेटफॉर्म की संख्या कम होती है, तो युद्ध के दौरान समन्वय और प्रतिक्रिया में देरी हो सकती है, जो किसी भी देश के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है.

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