ईरान ने इजरायल पर की मिसाइलों की बौछार, फिर परमाणु वार्ता पर लगाया बड़ा आरोप

ईरान ने इजरायल पर हमले तभी रोकने का संकेत दिया जब इजरायल अपने सैन्य अभियान को रोकेगा, जो ईरान के खिलाफ है. विदेश मंत्री अराक्ची ने इजरायल के परमाणु हमलों, अमेरिका की भूमिका और पश्चिमी देशों की आलोचना की. ईरान ने परमाणु वार्ता को विफल करने के प्रयास का भी आरोप लगाया.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

ईरान ने रविवार को कहा कि इजरायल पर उसके हमले तभी बंद होंगे जब यहूदी राज्य अपने सैन्य अभियान को रोक देगा, जो ईरान के खिलाफ जारी है. तेहरान का कहना है कि उसकी प्रतिक्रिया आत्मरक्षा के आधार पर थी, और वह संघर्ष को बढ़ाने की योजना नहीं बना रहा था. यह बयान उस समय आया जब शनिवार रात से रविवार रात तक ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार की, जिसमें बच्चों सहित दस लोग मारे गए और लगभग 200 लोग घायल हो गए, जैसा कि इजरायली आपातकालीन सेवाओं ने रिपोर्ट किया.

संघर्ष के विस्तार का खतरा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि उनका देश इजरायल के साथ संघर्ष को अन्य पड़ोसी देशों तक नहीं फैलाना चाहता है, जब तक कि स्थिति मजबूर न हो. उनका यह भी कहना था कि यदि इजरायल ने संघर्ष को फारस की खाड़ी तक बढ़ाने का प्रयास किया, तो यह एक बड़ी रणनीतिक गलती होगी. उन्होंने इसे "युद्ध को बढ़ाने" के प्रयास के रूप में देखा. इसके अलावा, अराक्ची ने इजरायल के हालिया हमलों की कड़ी आलोचना की, जिसमें ईरान के परमाणु स्थलों को निशाना बनाने का आरोप लगा.

इजरायल का परमाणु स्थल पर हमला

तेहरान ने आरोप लगाया कि इजरायल ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करके "नई लाल रेखा" पार कर दी है. अराक्ची ने यह भी कहा कि इजरायल का यह कदम अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और यह "जायोनी शासन" द्वारा परमाणु सुविधाओं पर हमला करने की कोशिश का हिस्सा है. इस हमले को लेकर ईरान ने यह कहा कि यह हमला उनकी सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है, और इससे स्थिति और भी बिगड़ सकती है.

परमाणु वार्ता में रुकावट

ईरान ने इजरायल पर आरोप लगाया कि वह ईरान-अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता को विफल करने की कोशिश कर रहा है, जो दोनों देशों के बीच एक समझौते का रास्ता खोल सकता था. यह वार्ता हाल ही में तनाव बढ़ने के कारण रद्द कर दी गई थी. अराक्ची ने कहा कि इजरायल का उद्देश्य इस वार्ता को पटरी से उतारना था, ताकि परमाणु समझौते की कोई संभावना न बने.

अमेरिकी भूमिका पर आरोप

ईरान ने यह भी दावा किया कि इजरायल की आक्रामकता में अमेरिकी सेना का समर्थन था. अराक्ची ने कहा कि उनके पास ठोस सबूत हैं कि इजरायल के हमलों को अमेरिकी सेना और अमेरिकी ठिकानों का समर्थन प्राप्त था. उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन की अनुमति के बिना इजरायल की आक्रामकता संभव नहीं हो सकती थी. ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिकी बयानों पर विश्वास नहीं करता, जिसमें कहा गया था कि हाल के हमलों में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी.

पश्चिमी देशों की आलोचना

ईरान के विदेश मंत्री ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भी आलोचना की और उसे इस्लामिक गणराज्य पर इजरायल के हमलों के प्रति "उदासीनता" का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने इजरायल की आक्रामकता के बजाय ईरान की निंदा की, जबकि यह वह पक्ष था जिसका उल्लंघन किया गया था. अराक्ची का कहना था कि यदि अमेरिका अपनी सद्भावना साबित करना चाहता है तो उसे ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर इजरायल के हमलों की निंदा करनी चाहिए.

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