नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है. वहीं अब ताजा जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने लगातार सातवीं रात ईरान के कई सैन्य और निगरानी ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में निगरानी केंद्र, सैन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं और भूमिगत हथियार भंडारण स्थलों को लक्ष्य बनाया गया.
दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अनुसार, उसने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, ओमान और सीरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. ईरान का कहना है कि इन हमलों में कई अहम सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जॉर्डन में अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कम से कम दो सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. हालांकि अब तक किसी सैनिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी रक्षा विभाग ने घायल सैनिकों की संख्या या उनकी स्थिति पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
जॉर्डन में अमेरिका की प्रमुख सैन्य मौजूदगी मुवाफ्फक सालती एयर बेस और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर है, जहां लड़ाकू विमान, ड्रोन और सैन्य सहायता इकाइयां तैनात रहती हैं. इन ठिकानों का इस्तेमाल क्षेत्र में अमेरिकी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
ईरान का दावा है कि उसने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया है. वहीं जॉर्डन की सेना का कहना है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जिससे बड़े नुकसान को टाल दिया गया. उधर, ईरान ने आरोप लगाया है कि हालिया अमेरिकी हमलों में उसके 46 लोगों की मौत हुई है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस सप्ताह के दौरान कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, हालांकि उन्होंने विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है. बता दें, मिडिल ईस्ट में दोनों देशों के बीच यह सैन्य टकराव इसी तरह जारी रहा, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है. First Updated : Saturday, 18 July 2026