ईरान के साउथ पार्स पर बड़ा हमला, इजरायल ने कहा- कंगाल हो जाएगा देश

इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स पर हमला कर उसकी ऊर्जा और अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दिया है. इससे मिडिल-ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ गया है और दुनिया भर में तेल-गैस महंगी होने की आशंका है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद गंभीर और खतरनाक चरण में पहुंचता दिख रहा है. ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट ‘साउथ पार्स’ पर एक और बड़ा हमला किया. यह वही रणनीतिक ऊर्जा केंद्र है, जिस पर इससे पहले भी मार्च में हमला हुआ था. उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए थे कि ईरान के ऊर्जा ढांचे को आगे निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन हालिया कार्रवाई ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है साउथ पार्स

इस हमले ने कई तरह की आशंकाओं को जन्म दिया है. एक ओर यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका को इस हमले की जानकारी थी या नहीं, वहीं दूसरी ओर यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं यह किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा तो नहीं. साउथ पार्स ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जहां से देश की लगभग 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है. ऐसे में इस ठिकाने पर हमला सीधे तौर पर ईरान की आर्थिक और ऊर्जा क्षमता को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हमले में रिफाइनरी और पाइपलाइन नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है. इसका असर ईरान के घरेलू बिजली उत्पादन, उद्योगों और राजस्व पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में लंबा समय लग सकता है, जिससे देश की वित्तीय स्थिति और बिगड़ सकती है.

इस घटनाक्रम का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है. वैश्विक स्तर पर गैस और तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ गई है. साउथ पार्स का क्षेत्र फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार का अहम मार्ग है. यदि यहां तनाव और बढ़ता है, तो भारत समेत कई देशों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है.

क्या है इजरायल का दावा?

इजराइल का दावा है कि ईरान अपनी गैस से होने वाली कमाई का इस्तेमाल उन संगठनों को समर्थन देने में करता है, जो उसके खिलाफ सक्रिय हैं. ऐसे में इस हमले का उद्देश्य ईरान के आर्थिक संसाधनों को सीमित करना बताया जा रहा है. दूसरी तरफ, ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उसके ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला हुआ तो वह कड़ा जवाब देगा.

इस हमले के बाद अब आशंका बढ़ गई है कि दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य टकराव की स्थिति बन सकती है, जिससे पूरा मध्य-पूर्व क्षेत्र अस्थिर हो सकता है. कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद, इस घटना ने शांति वार्ता की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है और हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं.

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