भारत से दोस्ती चाहता है जमात-ए-इस्लामी, बांग्लादेश में चुनाव से पहले बदले सुर
बांग्लादेश के आगामी राष्ट्रीय चुनावों से पहले जमात-ए-इस्लामी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया है. घोषणापत्र में भारत समेत पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक और सहयोगात्मक संबंधों पर जोर दिया गया है.

बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव नजदीक आते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में इस्लामिक कंज़र्वेटिव पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने बुधवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया, जिसमें विदेश नीति को लेकर कई अहम वादे किए गए हैं. पार्टी ने साफ किया है कि सत्ता में आने पर वह भारत समेत सभी पड़ोसी देशों के साथ सकारात्मक, सहयोगपूर्ण और संतुलित रिश्ते कायम करने की दिशा में काम करेगी.
घोषणापत्र में क्या कहा गया?
घोषणापत्र में कहा गया है कि भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड जैसे देशों के साथ शांतिपूर्ण और मित्रवत संबंधों को प्राथमिकता दी जाएगी. जमात-ए-इस्लामी का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए पड़ोसी देशों के साथ आपसी संवाद और सहयोग बेहद जरूरी है. पार्टी ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय संबंध आपसी सम्मान, समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित होंगे.
विदेश नीति के तहत पार्टी ने बांग्लादेश की वैश्विक छवि को बेहतर बनाने का भी संकल्प लिया है. घोषणापत्र में बांग्लादेशी पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ाने और विदेश यात्रा को आसान बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की बात कही गई है. पार्टी का दावा है कि इससे न केवल आम नागरिकों को लाभ मिलेगा, बल्कि देश की वैश्विक पहचान भी मजबूत होगी.
जमात-ए-इस्लामी ने मुस्लिम बहुल देशों के साथ रिश्तों को और सशक्त करने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है. इसके साथ ही पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बांग्लादेश के व्यापार और रणनीतिक हितों को विस्तार मिल सके.
घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बांग्लादेश की सक्रिय भागीदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है. पार्टी ने वैश्विक मंचों पर शांति, मानवाधिकार, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाने की बात कही है.
जमात-ए-इस्लामी ने क्या है?
रोहिंग्या संकट को लेकर भी पार्टी ने स्पष्ट रुख अपनाया है. जमात-ए-इस्लामी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वैच्छिक वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में बांग्लादेश की भागीदारी जारी रखने का भी वादा किया गया है.
यह घोषणापत्र ऐसे समय जारी हुआ है जब 12 फरवरी को देश में राष्ट्रीय चुनाव और संवैधानिक जनमत संग्रह होने वाला है. सत्तारूढ़ आवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख राजनीतिक ताकतों के रूप में उभरी हैं. जुलाई 2024 के जनआंदोलन के बाद बदले राजनीतिक हालात ने चुनाव को और भी अहम बना दिया है. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप समेत कई संस्थाओं ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है. ऐसे में यह चुनाव बांग्लादेश के भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है.


