अमेरिका-ईरान डील में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और यूरेनियम सहित कौन-कौन से मुद्दे शामिल? जानें सब कुछ
अमेरिकी मीडिया एक्सियोस के मुताबिक दोनों देश एक समझौता ज्ञापन यानी MOU पर साइन कर सकते हैं। यह शुरुआती समझौता 60 दिनों के लिए लागू रहेगा और दोनों पक्ष चाहें तो इसे आगे बढ़ा सकते हैं।

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब आखिरी पड़ाव पर है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि यह डील फाइनल हो जाती है तो 60 दिनों के लिए सीजफायर बढ़ेगा। होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल दिया जाएगा और ईरान को बिना रुकावट तेल बेचने की छूट मिल सकती है। इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत भी शुरू होगी।
60 दिन का MOU, माइंस हटाएगा ईरान!
अमेरिकी मीडिया एक्सियोस के मुताबिक दोनों देश एक समझौता ज्ञापन यानी MOU पर साइन कर सकते हैं। यह शुरुआती समझौता 60 दिनों के लिए लागू रहेगा और दोनों पक्ष चाहें तो इसे आगे बढ़ा सकते हैं।
डील के तहत ईरान होर्मुज स्ट्रेट में बिछाए गए माइंस हटाएगा, जिससे जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके। बदले में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी कम करेगा और कुछ प्रतिबंधों में राहत देगा। इससे ईरान फिर से खुलकर कच्चा तेल बेच पाएगा।
परमाणु कार्यक्रम पर क्या सहमति बनी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभी न्यूक्लियर मुद्दे पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। ड्राफ्ट में ईरान ने भरोसा दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। यूरेनियम संवर्धन को सीमित करने और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार हटाने पर बात हो रही है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक हटाने पर सहमति जताई है। ईरान के पास करीब 440 किलो संवर्धित यूरेनियम है। हालांकि ईरान ने साफ किया है कि वह यह यूरेनियम अमेरिका को नहीं सौंपेगा।
वादों पर अमल के बाद ही हटेंगे प्रतिबंध
सूत्र बताते हैं कि ईरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को कुछ रियायतों के संकेत दिए हैं। अमेरिका का रुख है कि प्रतिबंध स्थायी तौर पर तभी हटेंगे और ईरानी फंड तभी अनफ्रीज होंगे जब ईरान अपने वादे पूरी तरह निभाएगा। इन 60 दिनों में क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना वहीं रहेगी। अंतिम समझौता होने के बाद ही सैनिकों की वापसी पर फैसला होगा।
इजराइल हिज्बुल्लाह संघर्ष खत्म करने का जिक्र
ड्राफ्ट डील में लेबनान में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच लड़ाई खत्म करने की बात भी है। इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इस पर चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर हिज्बुल्लाह दोबारा हमला करता है या हथियार जुटाता है तो इजराइल जवाबी कार्रवाई कर सकेगा।
डील तक कैसे पहुंचे दोनों देश
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कई अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल पर इस डील पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार सभी नेताओं ने समझौते का समर्थन किया।
कॉल में यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के अलावा सऊदी अरब, कतर, मिस्र, तुर्किए और पाकिस्तान के नेता शामिल थे। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हाल ही में तेहरान गए थे। व्हाइट हाउस को उम्मीद है कि बाकी मुद्दे जल्द सुलझ जाएंगे। रविवार तक डील का ऐलान हो सकता है।


