ईरान में सीजफायर के बीच सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब... खामेनेई की मौत के 40 दिन पूरे होने पर देशभर में रैलियां
ईरान में खामेनेई की मौत के 40 दिन पूरे होने पर देशभर में भारी भीड़ उमड़ी. इसी बीच अमेरिका-ईरान सीजफायर लागू हुआ है, लेकिन हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं.

ईरान में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है. पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मौत के 40 दिन पूरे होने पर देशभर में हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उतर आए, जिससे माहौल बेहद भावुक और गंभीर हो गया. ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली. यह भीड़ सिर्फ शोक जताने के लिए नहीं थी, बल्कि अपने नेता के प्रति सम्मान और एकजुटता दिखाने के लिए भी थी.
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तेहरान के रिपब्लिक स्क्वायर में आयोजित एक बड़े स्मरण समारोह में हिस्सा लिया. यहां से एक विशाल जुलूस निकाला गया, जो उस स्थान तक पहुंचा जहां हमले में खामेनेई की जान गई थी.लोग नारे लगाते हुए और अपने नेता के सिद्धांतों के प्रति निष्ठा जताते हुए सड़कों पर नजर आए. यह शोक सभा सुबह से शुरू होकर देर रात तक चलने की संभावना जताई गई.
28 फरवरी का हमला: दर्दनाक यादें
ईरान में यह शोक कार्यक्रम उस हमले की याद में आयोजित किया गया, जो 28 फरवरी को हुआ था. उसी दिन अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए हमलों में अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई थी. इन हमलों में उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए थे.
इसके अलावा देश के कई बड़े सैन्य अधिकारी, जैसे मेजर जनरल अब्दोलरहीम मौसवी और रियर एडमिरल अली शामखानी भी इस हमले में जान गंवा बैठे. सबसे दुखद घटना मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल में हुई, जहां हमले के दौरान 170 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. इनमें बड़ी संख्या में छोटे बच्चे शामिल थे. इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.
ईरान का जवाब और बढ़ा तनाव
इन हमलों के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया. सेना ने इजरायल के नियंत्रण वाले क्षेत्रों और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया और हालात काफी गंभीर हो गए. कई दिनों तक चले इस टकराव के बाद आखिरकार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई, जिससे हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की गई.
लगातार बढ़ते तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आई है. ईरान और अमेरिका के बीच 14 दिन के लिए सीजफायर लागू किया गया है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के अनुसार, इस समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद यह अस्थायी शांति समझौता संभव हो पाया.
‘खामेनेई की सोच आज भी जिंदा’
सीजफायर के बावजूद ईरान में भावनाएं अभी भी उफान पर हैं. इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बयान जारी कर कहा कि खामेनेई की विचारधारा आज भी उतनी ही मजबूत है, जितनी उनके जीवनकाल में थी. संगठन का कहना है कि उनके सिद्धांत- प्रतिरोध, स्वतंत्रता और न्याय आज भी देश को दिशा दे रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे.


