ईरान-होर्मुज विवाद के बीच ट्रंप का बड़ा कदम? यूरोप से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर मंथन

ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और नाटो के रिश्तों में खटास साफ दिख रही है. इसी बीच खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप यूरोप से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और नाटो सहयोगियों के रिश्तों में दरार गहराती नजर आ रही है. इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूरोप से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है.

रॉयटर्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप नाटो सहयोगियों की भूमिका से नाखुश हैं. खासतौर पर ईरान संघर्ष और ग्रीनलैंड को लेकर उनकी योजनाओं में प्रगति न होने से उनकी निराशा बढ़ी है, जिसके चलते उन्होंने सलाहकारों के साथ सैनिकों की वापसी पर चर्चा की है.

नाटो सहयोगियों से बढ़ी नाराजगी

अधिकारी के अनुसार, नाटो देशों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी महत्वाकांक्षाओं में सहयोग न मिलने से ट्रंप नाराज हैं. इसी कारण उन्होंने यूरोप से सैनिकों को हटाने के विकल्प पर विचार किया है.

अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं

हालांकि, इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. व्हाइट हाउस ने अभी तक पेंटागन को सैनिकों की वापसी के लिए कोई ठोस योजना तैयार करने का निर्देश भी नहीं दिया है. इसके बावजूद, आंतरिक चर्चाएं अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव की ओर इशारा करती हैं.

नाटो महासचिव की यात्रा भी बेअसर

यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया जब नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने हाल ही में व्हाइट हाउस का दौरा किया. हालांकि, इस बैठक से दोनों पक्षों के रिश्तों में सुधार के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले. अधिकारियों के अनुसार, 1949 में नाटो की स्थापना के बाद से यह संबंध अपने सबसे तनावपूर्ण दौर में हैं.

यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती

वर्तमान में अमेरिका के 80,000 से अधिक सैनिक यूरोप के विभिन्न देशों में तैनात हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा रहे हैं. जर्मनी में सबसे ज्यादा 30,000 से अधिक सैनिक मौजूद हैं, जबकि इटली, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन में भी बड़ी संख्या में अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं.

ईरान युद्ध के बाद बढ़ा तनाव

ट्रंप की नाराजगी पिछले कुछ महीनों से बढ़ रही है. वे लगातार यूरोपीय देशों पर रक्षा खर्च कम करने का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन ईरान संघर्ष के बाद हालात और बिगड़ गए हैं. राष्ट्रपति इस बात से भी असंतुष्ट हैं कि नाटो देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए सक्रिय भूमिका नहीं निभाई, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है.

ग्रीनलैंड मुद्दे ने बढ़ाई दूरी

डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर नियंत्रण स्थापित करने के अमेरिकी प्रयासों ने भी अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है. इस मुद्दे को लेकर यूरोपीय देशों में चिंता देखी जा रही है.

नाटो की ओर से अस्पष्टता

नाटो के राजनयिकों का कहना है कि अमेरिका ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि होर्मुज से जुड़े अभियानों में सहयोगी देशों से वह किस तरह की भूमिका की अपेक्षा करता है या उन्हें किन क्षमताओं के साथ योगदान देना चाहिए.

सैनिकों की वापसी पर फोकस

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यूरोप के भीतर सैनिकों की तैनाती में बदलाव की संभावना जताई गई थी. हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ट्रंप की चर्चाएं सैनिकों को अन्य स्थानों पर भेजने के बजाय उन्हें अमेरिका वापस बुलाने पर केंद्रित रही हैं.

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