ईरान क्यों नहीं टूटा बड़े हमलों के बाद भी, मोहम्मद अली जाफरी की मोजेक डिफेंस रणनीति के सामने फेल हुई अमेरिका की युद्ध योजना

मध्य पूर्व में जंग तेज है लेकिन ईरान अभी भी मजबूती से खड़ा है. इसके पीछे एक सैन्य दिमाग है. नाम है मोहम्मद अली जाफरी और उनकी मोजेक डिफेंस रणनीति.

Shraddha Mishra

मध्य पूर्व में युद्ध की आग तेजी से फैल रही है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया. लड़ाकू विमान,ड्रोन और मिसाइलों से कई अहम ठिकाने निशाना बने. दुनिया को लगा था कि ईरान जल्दी झुक जाएगा. क्योंकि इराक युद्ध में ऐसा ही हुआ था. लेकिन इस बार तस्वीर अलग है. हमलों के कई दिन बाद भी ईरान मजबूती से खड़ा है. और इसकी वजह है ईरान की एलीट फोर्स IRGC के पूर्व चीफ मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी. 

क्या इस मजबूती के पीछे कोई योजना है?

ईरान के टिके रहने के पीछे एक खास सैन्य सोच काम कर रही है. इसे मोजेक डिफेंस कहा जाता है. यह रणनीति अचानक नहीं बनी थी. इसे सालों पहले तैयार किया गया था. इसका मकसद साफ था. अगर युद्ध हो तो देश तुरंत न गिरे. और सेना बिना आदेश के भी लड़ सके. यही वजह है कि हमला होने के बाद भी सिस्टम नहीं टूटा. 

आखिर मोजेक डिफेंस किसने बनाई?

इस रणनीति के पीछे ईरान के सैन्य नेता मोहम्मद अली जाफरी का दिमाग है. वह ईरान की ताकतवर फोर्स आईआरजीसी के पूर्व प्रमुख रहे हैं. जाफरी ने सालों पहले यह खतरा समझ लिया था. उन्हें लगा कि भविष्य में ईरान भी इराक जैसा हमला झेल सकता है. इसी सोच ने उन्हें नई सैन्य योजना बनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने ऐसी रणनीति बनाई जो पूरी सेना को अलग ढांचे में बदल देती है. 

इराक युद्ध से क्या बड़ा सबक मिला?

2003 का इराक युद्ध जाफरी के लिए बड़ा सबक था. अमेरिका ने सद्दाम हुसैन की सेना को जल्दी हरा दिया था. इसका सबसे बड़ा कारण केंद्रीकृत कमान थी. ऊपर का नेतृत्व खत्म हुआ और सेना बिखर गई. जाफरी ने तय किया कि ईरान में ऐसा नहीं होगा. अगर शीर्ष नेता भी मारे जाएं तो भी सेना लड़ेगी. यही सोच मोजेक रणनीति की नींव बनी. 

ईरान की सेना को कैसे बदला गया?

जाफरी ने सेना को छोटे स्वतंत्र ढांचों में बांटना शुरू किया. देशभर में अलग अलग कमांड बनाई गईं. कुल मिलाकर इकतीस क्षेत्रीय कमांड खड़ी की गईं. हर कमांड के पास अपने सैनिक और संसाधन हैं. कई जगह मिसाइल और ड्रोन यूनिट भी तैनात हैं. उन्हें हर बार ऊपर से आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ता. पहले से तय योजना के अनुसार वे तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं. 

आखिर कौन हैं मोहम्मद अली जाफरी?

मोहम्मद अली जाफरी का सैन्य करियर लंबा और अहम रहा है. उन्होंने आईआरजीसी में इंटेलिजेंस यूनिट से शुरुआत की थी. ईरान इराक युद्ध में भी उन्होंने हिस्सा लिया. धीरे धीरे वे सेना में ऊपर बढ़ते गए. 1990 के दशक में उन्हें ग्राउंड फोर्स की जिम्मेदारी मिली. तेहरान की सुरक्षा वाली सरल्लाह यूनिट का नेतृत्व भी उन्होंने किया. बाद में उन्हें रणनीतिक अध्ययन केंद्र का प्रमुख बनाया गया. 

क्या यह रणनीति युद्ध बदल सकती है?

आज मोजेक डिफेंस की चर्चा दुनिया भर में हो रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे युद्ध की सोच बदल सकती है. क्योंकि अब सेना सिर्फ एक कमान पर निर्भर नहीं रहती. छोटी स्वतंत्र इकाइयां भी बड़ा असर डाल सकती हैं. ईरान का मौजूदा युद्ध इसका उदाहरण बन गया है. हमलों के बाद भी सिस्टम काम कर रहा है. और यही रणनीति दुश्मन की तेज जीत की योजना को धीमा कर देती है. 

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