नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति की खबर सामने आई है. बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इस पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं. माना जा रहा है कि यह समझौता मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम साबित हो सकता है.
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान पर पड़ता दिखाई दे रहा है. जानकारी के अनुसार पिछले कई महीनों से पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित कराने वाले देश के रूप में पेश कर रहा था. इस दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने दोनों देशों के साथ संपर्क बनाए रखकर शांति प्रयासों में भूमिका निभाने की कोशिश की थी. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अगर समझौते पर उसके यहां हस्ताक्षर होते हैं तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कूटनीतिक पहचान मिल सकती है.
हालांकि, ताजा संकेतों से साफ है कि समझौते पर हस्ताक्षर पाकिस्तान में नहीं बल्कि यूरोप के किसी शहर में हो सकते हैं. इससे इस्लामाबाद की उस उम्मीद को झटका लगा है, जिसमें वह खुद को इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का केंद्र बनाना चाहता था.
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है. अमेरिका का मानना है कि समझौते से क्षेत्रीय तनाव कम होगा और वैश्विक तेल आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं ईरान की ओर से अभी भी सतर्क रुख अपनाया जा रहा है. तेहरान का कहना है कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन अंतिम सहमति बनने से पहले सभी बिंदुओं की समीक्षा जरूरी है.
अमेरिका ने तटस्थ और सुरक्षित माहौल को देखते हुए यूरोप को समझौते के लिए अधिक उपयुक्त स्थान माना है. बता दें, जेनेवा और वियना जैसे शहर पहले भी कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों की मेजबानी कर चुके हैं. अब दुनिया की नजरें इस संभावित समझौते पर टिकी हैं. अगर यह सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नया अध्याय शुरू होगा, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है. First Updated : Friday, 12 June 2026