भारतीय टैंकर पर फायरिंग के बाद ऐक्शन में नौसेना, हॉर्मुज में फंसे 14 जहाजों को निकालने की कोशिश तेज

हॉर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों पर हुई फायरिंग के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया है. विक्रम मिस्री की पहल के बीच नौसेना भी सक्रिय हो गई है, लेकिन फंसे जहाजों की स्थिति अभी भी चिंता बढ़ा रही है. कम से कम 14 भारतीय झंडे वाले जहाज अभी भी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में फंसे हुए हैं.

Shraddha Mishra

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जिसने भारत को तुरंत एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया. 18 अप्रैल को दो भारतीय झंडे वाले जहाजों पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी को भारत ने बेहद गंभीर माना है. इस घटना के बाद भारत सरकार ने तुरंत कूटनीतिक स्तर पर कदम उठाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. साथ ही, इलाके में फंसे भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी तेजी से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं.

घटना के बाद भारत ने साफ संकेत दिया कि वह अपने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूत से मुलाकात कर भारत की गहरी चिंता जताई. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी पुष्टि की कि भारत लगातार राजनयिक माध्यमों से ईरान के संपर्क में है. उन्होंने कहा कि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना ईरानी अधिकारियों और स्थानीय IRGC यूनिट के बीच संचार की कमी के कारण हुई प्रतीत होती है. राहत की बात यह रही कि जहाजों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा, हालांकि कुछ हिस्सों में कांच टूटने की खबर सामने आई है.

UKMTO रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ

इस घटना का जिक्र यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की रिपोर्ट में भी किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अप्रैल को कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें दो भारतीय जहाज शामिल थे. पहली घटना में एक भारतीय तेल टैंकर के पास दो ईरानी गनबोट्स पहुंचीं और बिना किसी चेतावनी या रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी. हालांकि, इस दौरान चालक दल पूरी तरह सुरक्षित रहा. दूसरी घटना में ओमान के तट के पास एक अन्य भारतीय सुपरटैंकर को निशाना बनाया गया. इस जहाज पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल के टकराने की सूचना मिली, जिससे इस व्यस्त समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

भारतीय नौसेना का बड़ा कदम

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने तुरंत कार्रवाई की. इलाके में सात युद्धपोत तैनात कर दिए गए हैं, जो भारतीय जहाजों को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट कर रहे हैं. नौसेना ने सभी जहाजों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें लारक आइलैंड से दूर रहने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की सलाह दी गई है. इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी तरह की नई घटना से बचा जा सके.

वर्तमान स्थिति और फंसे जहाज

फिलहाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है. यहां कम से कम 14 भारतीय झंडे वाले जहाज अभी भी फंसे हुए हैं. इनमें तीन बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी कैरियर भी शामिल हैं. इससे पहले 28 फरवरी को क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद भारत 10 भारतीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाल चुका है. अब बाकी जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसके अलावा ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है.

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है. यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की आपूर्ति होती है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था जुड़ी हुई है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है.

आगे की रणनीति और भारत की कोशिश

भारत इस पूरे मामले को लेकर लगातार ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाए हुए है. कोशिश यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके. सरकार और नौसेना दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि फंसे हुए जहाज और उनमें सवार लोग सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच सकें.

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