ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल: विदेश नीति से लेकर अर्थव्यवस्था तक, बदला अमेरिका का सियासी चेहरा

डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को एक साल पूरा हो चुका है. इस दौरान अमेरिका ने आक्रामक विदेश नीति, सख्त आव्रजन कानून, आर्थिक प्रयोगों और व्हाइट हाउस में बड़े बदलावों का दौर देखा, जिसने देश और दुनिया दोनों में तीखी राजनीतिक बहस को जन्म दिया.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को शपथ ग्रहण के साथ जब व्हाइट हाउस में ऐतिहासिक वापसी की थी, तब उन्होंने "अमेरिका के स्वर्ण युग" की शुरुआत का ऐलान किया था. दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में ट्रम्प प्रशासन ने ऐसे कई फैसले लिए, जिन्होंने न सिर्फ अमेरिका की घरेलू राजनीति बल्कि वैश्विक मंच पर भी गहरी हलचल पैदा की.

बीते 12 महीनों में ट्रम्प के फैसलों, वादों और विवादों ने देश में तीखी बहस को जन्म दिया है. सत्ता संभालते ही ताबड़तोड़ कार्यकारी आदेश, सख्त आव्रजन नीति, आक्रामक विदेश नीति और संघीय ढांचे में बड़े बदलाव-इन सबने उनके दूसरे कार्यकाल को पहले ही साल में बेहद अहम और विवादास्पद बना दिया है.

सत्ता संभालते ही बड़े फैसले

पदभार ग्रहण करने के कुछ ही घंटों के भीतर राष्ट्रपति ट्रम्प ने 200 से ज्यादा कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए. इनमें पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के लगभग 80 आदेशों को रद्द करना और 6 जनवरी को अमेरिकी कैपिटल में हुए विद्रोह से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए करीब 1,500 लोगों को माफी देना शामिल था.

अपने उद्घाटन भाषण में ट्रम्प ने कहा था,"आज से हमारा देश फिर से समृद्ध होगा और पूरी दुनिया में सम्मानित होगा. हम हर राष्ट्र के लिए ईर्ष्या का पात्र होंगे, और हम अब किसी को भी अपना फायदा उठाने नहीं देंगे. ट्रंप प्रशासन के हर एक दिन में, मैं सीधे-सीधे 'अमेरिका सर्वोपरि' के सिद्धांत को अपनाऊंगा."

विदेश नीति 'शक्ति के माध्यम से शांति'

चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने खुद को वैश्विक शांतिदूत के रूप में पेश किया था. शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने कहा,"मेरी सबसे गौरवपूर्ण विरासत एक शांतिदूत और एकता स्थापित करने वाले व्यक्ति की होगी. मैं यही बनना चाहता हूं, एक शांतिदूत और एकता स्थापित करने वाला व्यक्ति."

पहले साल में ट्रम्प प्रशासन ने कई बड़े और विवादित विदेश नीति फैसले लिए. इनमें वेनेजुएला के नेता को पकड़ने के लिए चलाया गया जमीनी अभियान, ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों के साथ बढ़ा तनाव और यूक्रेन से मध्य पूर्व तक शांति स्थापित करने के प्रयास शामिल रहे.

गाजा युद्धविराम और 'डोनरो सिद्धांत'

ट्रम्प प्रशासन की एक बड़ी उपलब्धि गाजा में इजरायल-हमास युद्ध के दौरान युद्धविराम समझौता रही. महीनों की कूटनीति के बाद हुआ यह समझौता कायम रहा और हाल ही में अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है.

इसी दौरान ट्रम्प ने "डोनरो सिद्धांत" पेश किया, जिसे मोनरो सिद्धांत का आधुनिक रूप बताया जा रहा है. इसके तहत पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया गया. वेनेजुएला में तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के प्रयास और ड्रग तस्करी के खिलाफ की गई कार्रवाइयों को इसी नीति का हिस्सा माना गया.

ग्रीनलैंड और यूक्रेन युद्ध पर अधूरे वादे

ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर की, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ गया. कार्यकाल के एक साल पूरे होने तक यह विवाद चरम पर पहुंच गया.

यूक्रेन युद्ध को पहले ही दिन खत्म करने का चुनावी वादा भी पूरा नहीं हो सका. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकातों और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ऐतिहासिक शिखर बैठक के बावजूद युद्ध जारी है. ट्रम्प खुद मान चुके हैं कि यह संघर्ष उनकी उम्मीद से कहीं अधिक जटिल है.

आव्रजन नीति: सख्ती और विवाद

अवैध आव्रजन पर सख्ती ट्रम्प के प्रमुख चुनावी वादों में से एक थी, जिसे उन्होंने लागू किया. ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में अमेरिका में शुद्ध प्रवासन कम से कम 50 वर्षों में पहली बार नकारात्मक रहा.

गृह सुरक्षा विभाग का दावा है कि ट्रम्प के पदभार संभालने के बाद से अब तक 6.22 लाख से ज्यादा लोगों को निर्वासित किया जा चुका है. ICE अभियानों के विस्तार को लेकर विरोध भी तेज हुआ. क्विनीपियाक यूनिवर्सिटी के सर्वे में 57% मतदाताओं ने ICE की कार्यप्रणाली से असहमति जताई, जबकि 40% ने समर्थन किया.

संघीय पुनर्गठन और DOGE

संघीय सरकार के ढांचे में भी बड़े बदलाव किए गए. अरबपति एलोन मस्क के साथ मिलकर ट्रम्प ने सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) की शुरुआत की. इसके तहत USAID को बंद किया गया और हजारों संघीय कर्मचारियों की छंटनी हुई.

मस्क ने मई में कहा था,"मुझे लगता है कि हम प्रभावी रहे हैं, उतने प्रभावी नहीं जितना मैं चाहता था, लेकिन हमने प्रगति की है."
हालांकि, 2 ट्रिलियन डॉलर की बचत के लक्ष्य के मुकाबले केवल 160 मिलियन डॉलर की बचत हो सकी.

आर्थिक नीतियां: टैरिफ से महंगाई तक

ट्रम्प ने आयात पर व्यापक टैरिफ लागू किए, जिनका मकसद घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना था. 2 अप्रैल को घोषित इन टैरिफ नीतियों के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और 3.1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ.

हालांकि बाद में कुछ टैरिफ पर रोक लगाई गई और कई देशों के साथ समझौते किए गए. इसके बावजूद रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी रही. दिसंबर में 50,000 नई नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर 4.4% रही.

महंगाई और खर्च का दबाव

नवीनतम CPI रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई दर 2.7% बढ़ी. मूडीज एनालिटिक्स के अनुसार, एक औसत अमेरिकी परिवार अब एक साल पहले की तुलना में प्रति माह 184 डॉलर और तीन साल पहले की तुलना में 590 डॉलर अधिक खर्च कर रहा है.

स्वास्थ्य और आवास योजनाएं

ट्रम्प ने 2026 की शुरुआत में स्वास्थ्य देखभाल योजना का अनावरण किया, लेकिन इसे लेकर कई सवाल बने हुए हैं. एक सर्वे में 52% मतदाताओं ने माना कि ट्रम्प ने स्वास्थ्य लागत को बढ़ावा दिया है.

आवास लागत कम करने के लिए भी योजना लाने का संकेत दिया गया है, हालांकि इसके विवरण स्पष्ट नहीं हैं.

व्हाइट हाउस में बड़े बदलाव

ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के स्वरूप में भी व्यापक बदलाव किए. ओवल ऑफिस से लेकर रोज़ गार्डन तक पुनर्निर्माण कराया गया. अक्टूबर 2025 में पूर्वी विंग को ध्वस्त कर 90,000 वर्ग फुट के नए भोज कक्ष का निर्माण कराया गया, जिस पर विपक्ष ने तीखी आलोचना की.

आगे की राह

ट्रम्प ने अपने कई चुनावी वादे पूरे किए हैं, लेकिन रॉयटर्स-इप्सोस सर्वे के मुताबिक उन्हें सभी मुद्दों पर बहुमत का समर्थन नहीं मिला है. मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं और यह देखना अहम होगा कि क्या ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुटा पाएंगे.

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